नारनौलः दृष्टि का न होना जीवन की राह में बाधा नहीं : नरेंद्र सूरा

 


आपकी आंतरिक शक्ति और दृढ़ इच्छाशक्ति ही असली पहचान

नारनाैल, 18 मार्च (हि.स.)। जिला एवं सत्र न्यायाधीश नरेंद्र सूरा ने नेत्रहीन कन्या विद्यालय व हुडा सेक्टर में स्थित संतोष मेमोरियल दिव्यांग एवं पुनर्वास केंद्र का दौरा किया। इस मौके पर मुख्य न्यायिक दंडाधिकारी नीलम कुमारी तथा जिला एवं सत्र न्यायाधीश नरेंद्र सूरा की धर्मपत्नी शीनू सूरा व उनके परिवार के सदस्य मौजूद रहे।

जिला एवं सत्र न्यायाधीश नरेंद्र सूरा ने बुधवार को नेत्रहीन कन्या विद्यालय के दौरा के दौरान छात्राओं का हाल चाल जाना और विद्यालय की शैक्षणिक व तकनीकी व्यवस्थाओं का जायजा लिया। उन्होंने छात्राओं को प्रोत्साहित करते हुए कहा कि दृष्टि का न होना जीवन की राह में बाधा नहीं है। आपकी आंतरिक शक्ति और दृढ़ इच्छाशक्ति ही आपकी असली पहचान है। कानून और समाज हर कदम पर आपके साथ है। आप स्वयं को कभी कमजोर न समझेंए क्योंकि आपकी मेधा और कौशल किसी भी सामान्य व्यक्ति से कम नहीं है। शिक्षा को अपना हथियार बनाएं और स्वावलंबी बनने का लक्ष्य रखें। साथ ही उन्होंने उनके अधिकारों और दिव्यांगजनों के लिए सरकार द्वारा चलाई जा रही कल्याणकारी योजनाओं के बारे में जानकारी दी।

संतोष मेमोरियल दिव्यांग एवं पुनर्वास केंद्र के निरीक्षण के दौरान जिला एवं सत्र न्यायाधीश नरेंद्र सूरा ने छात्रावास और रसोई घर का निरीक्षण किया। बच्चों को दिए जाने वाले भोजन की गुणवत्ता और रहने के स्थान पर साफ.सफाई को लेकर संतोष व्यक्त किया गया। उन्होंने केंद्र को निर्देश दिए कि बच्चों के कौशल विकास पर और अधिक ध्यान दिया जाए ताकि वे भविष्य में आर्थिक रूप से आत्मनिर्भर बन सकें। उन्होंने बच्चों को उनके अधिकारों के बारे में भी जागरूक किया। इस मौके पर बच्चों ने सांस्कृतिक कार्यक्रम प्रस्तुत किए। निरीक्षण के दौरान अंध विद्यालय व संतोष मेमोरियल दिव्यांग एवं पुनर्वास केंद्र में बच्चों को खाद्य सामग्री भी वितरित की।

हिन्दुस्थान समाचार / श्याम सुंदर शुक्ला