नारनौलः अखा तीज पर बाल विवाह रोकने के लिए प्रशासन सख्त, हर शादी पर रहेगी नजर

 

नाबालिग पाए जाने पर होगी कानूनी कार्रवाई, आमजन से सहयोग की अपील

नारनाैल, 24 मार्च (हि.स.)। जिले में अक्षय तृतीया (अखा तीज) के अवसर पर होने वाले विवाह समारोहों को लेकर जिला प्रशासन पूरी तरह सतर्क हो गया है। इस दिन बड़ी संख्या में शादियां होने के चलते बाल विवाह की आशंका को देखते हुए प्रशासन ने विशेष निगरानी रखने का निर्णय लिया है।

जिला महिला संरक्षण एवं बाल विवाह निषेध अधिकारी सरिता शर्मा ने मंगलवार को बताया कि बाल विवाह एक गंभीर सामाजिक बुराई होने के साथ-साथ दंडनीय अपराध भी है। प्रशासन का लक्ष्य है कि इस बार अक्षय तृतीया (19 अप्रैल) पर जिले में एक भी बाल विवाह न हो। उन्होंने कहा कि अक्सर इस दिन सामूहिक विवाह समारोहों की आड़ में नाबालिगों की शादी कर दी जाती है, जिसे किसी भी सूरत में बर्दाश्त नहीं किया जाएगा।

उन्होंने स्पष्ट किया कि यदि किसी विवाह में लड़के की उम्र 21 वर्ष से कम या लड़की की उम्र 18 वर्ष से कम पाई जाती है तो संबंधित लोगों के खिलाफ सख्त कानूनी कार्रवाई की जाएगी। साथ ही अब बाल विवाह के मामलों में पोक्सो एक्ट के तहत भी केस दर्ज करने का प्रावधान लागू किया गया है, जिससे दोषियों पर और अधिक कड़ी कार्रवाई संभव हो सकेगी। प्रशासन ने समाज के विभिन्न वर्गों से सहयोग की अपील की है। मंदिरों के पुजारियों, गांव के पंच-सरपंच, आंगनबाड़ी कार्यकर्ताओं, नम्बरदारों और शहरी क्षेत्रों के पार्षदों से कहा गया है कि वे अपने-अपने क्षेत्र में होने वाले विवाह समारोहों पर नजर रखें और यह सुनिश्चित करें कि शादी करने वाले लड़का-लड़की बालिग हों। इसके अलावा सामुदायिक केंद्रों, बैंक्वेट हॉल, मैरिज पैलेस और प्रिंटिंग प्रेस संचालकों को भी निर्देश दिए गए हैं कि वे विवाह से संबंधित बुकिंग करते समय संबंधित पक्षों से आयु प्रमाण पत्र अवश्य जांचें। जिला महिला संरक्षण एवं बाल विवाह निषेध अधिकारी सरिता शर्मा ने आमजन से भी अपील की है कि यदि कहीं बाल विवाह की सूचना मिले तो तुरंत महिला हेल्पलाइन 1091 या नजदीकी पुलिस स्टेशन को सूचित करें। उन्होंने कहा कि सामूहिक प्रयास से ही इस कुप्रथा को जड़ से खत्म किया जा सकता है।

हिन्दुस्थान समाचार / श्याम सुंदर शुक्ला