हिसार : आयुर्वेदिक ज्ञान को आधुनिक अनुसंधान से जोड़कर नए अवसर विकसित किए जा सकते हैं : डॉ. अनिश यादव

 


लुवास में 11वें आयुर्वेद दिवस पर विशेषज्ञ व्याख्यान आयोजित

हिसार, 29 सितंबर (हि.स.)। लाला लाजपत राय पशुचिकित्सा एवं पशु विज्ञान विश्वविद्यालय

(लुवास) में 11वें आयुर्वेद दिवस के अवसर पर भारतीय ज्ञान प्रणाली सेल एवं मानव संसाधन

प्रबंधन निदेशालय की ओर से आयुर्वेद : स्वस्थ कल का आधार विषय पर मंगलवार काे विशेषज्ञ व्याख्यान

आयोजित किया गया। कार्यक्रम का उद्देश्य विद्यार्थियों एवं विश्वविद्यालय समुदाय को

आयुर्वेद की समृद्ध ज्ञान परंपरा, मूल सिद्धांतों और वर्तमान समय में इसकी प्रासंगिकता

से अवगत कराना रहा।

पशु चिकित्सा विज्ञान महाविद्यालय के अधिष्ठाता डॉ. अनिश

यादव इसमें मुख्य अतिथि रहे। विशेषज्ञ वक्ता डॉ. गोपेश कुमार शर्मा, प्रोफेसर, द्रव्यगुण

विज्ञान विभाग, एमएसएम इंस्टीट्यूट ऑफ आयुर्वेद, भगत फूल सिंह महिला विश्वविद्यालय,

खानपुर कलां, सोनीपत ने आयुर्वेद के विभिन्न आयामों, औषधीय पौधों के महत्व और स्वास्थ्य

संरक्षण में इसकी भूमिका पर विस्तार से प्रकाश डाला। डॉ. शर्मा ने आयुर्वेदिक ज्ञान को वैज्ञानिक दृष्टिकोण और आधुनिक अनुसंधान

से जोड़ने की आवश्यकता पर बल दिया। उन्होंने विद्यार्थियों को भारतीय ज्ञान परंपरा

के वैज्ञानिक एवं व्यावहारिक पक्षों का अध्ययन करने के लिए प्रेरित किया।

मुख्य अतिथि डॉ. अनिश यादव ने कहा कि भारतीय ज्ञान परंपरा में आयुर्वेद का

महत्वपूर्ण स्थान है। पारंपरिक ज्ञान को आधुनिक वैज्ञानिक अनुसंधान से जोड़कर मानव

एवं पशु स्वास्थ्य के क्षेत्र में नए अवसर विकसित किए जा सकते हैं। उन्होंने विद्यार्थियों

को भारतीय ज्ञान प्रणालियों के वैज्ञानिक अध्ययन, संरक्षण और संवर्धन के लिए प्रेरित

किया। कार्यक्रम की मुख्य आयोजक एवं निदेशक, मानव संसाधन प्रबंधन निदेशालय, लुवास,

डॉ. सोनिया सिंधु ने विशेषज्ञ वक्ता डॉ. गोपेश कुमार शर्मा को स्मृति-चिह्न भेंट कर

सम्मानित किया। कार्यक्रम का संचालन डॉ. विजेयता तिवारी ने किया। उन्होंने कार्यक्रम

की रूपरेखा प्रस्तुत करने के साथ विशेषज्ञ वक्ता का परिचय कराया। अंत में डॉ. अमन सिन्हा

ने धन्यवाद ज्ञापित किया। इस अवसर पर भारतीय ज्ञान प्रणाली सेल के सदस्यों सहित विश्वविद्यालय के अधिकारी,

शिक्षक एवं विद्यार्थी उपस्थित रहे। कार्यक्रम में आयुर्वेद एवं भारतीय ज्ञान परंपरा

के संरक्षण, संवर्धन तथा वैज्ञानिक अनुसंधान के माध्यम से इसके प्रभावी उपयोग की आवश्यकता

पर जोर दिया गया।

हिन्दुस्थान समाचार / राजेश्वर