सोनीपत: राष्ट्रीय गोकुल मिशन से नस्ल सुधार और संरक्षण पर विशेष बल: मुख्यमंत्री
मुख्यमंत्री ने
602 गौशालाओं को 68 करोड़ 34 लाख अनुदान दिया
सोनीपत, 03 मार्च (हि.स.)। मुख्यमंत्री नायब सिंह सैनी ने जिला सोनीपत के गांव भटगांव में आयोजित
राज्यस्तरीय गौशाला चारा अनुदान वितरण समारोह में प्रदेश की 602 पंजीकृत गौशालाओं के
लिए 68 करोड़ 34 लाख रुपये की चारा अनुदान राशि जारी की। कार्यक्रम के दौरान मुख्यमंत्री
ने प्रदेशवासियों को होली पर्व की शुभकामनाएं भी दीं।
मुख्यमंत्री ने मंगलवार काे कहा कि राष्ट्रीय गोकुल मिशन से नस्ल सुधार और संरक्षण पर विशेष
बल दिया जा रहा है। गौमाता भारतीय संस्कृति, आस्था और संवेदनशीलता की प्रतीक हैं। गौसेवा
केवल धार्मिक विषय नहीं, बल्कि सामाजिक समरसता, ग्रामीण अर्थव्यवस्था और पर्यावरण संरक्षण
से भी जुड़ा है। सरकार का लक्ष्य गौशालाओं को आर्थिक रूप से सशक्त बनाकर आत्मनिर्भर
बनाना है। उन्होंने भटगांव की दोनों ग्राम पंचायतों तथा धर्मार्थ गौशाला भटगांव को
21-21 लाख रुपये देने की घोषणा की। उन्होंने बताया कि सोनीपत जिले की 27 पंजीकृत गौशालाओं को 5 करोड़ 60 लाख रुपये
की राशि जारी की गई है। वर्तमान में 602 पंजीकृत गौशालाओं को यह अनुदान दिया जा रहा
है, जिससे हजारों गौवंश के लिए चारे की समुचित व्यवस्था सुनिश्चित होगी।
मुख्यमंत्री के अनुसार, पिछले सवा 11 वर्षों में पंजीकृत गौशालाओं को 457 करोड़
41 लाख रुपये की अनुदान राशि दी गई थी। आज जारी की गई राशि को जोड़ने पर यह आंकड़ा
बढ़कर 525 करोड़ 75 लाख रुपये से अधिक हो गया है। वर्ष 2014 तक प्रदेश में 215 पंजीकृत
गौशालाएं थीं, जिनमें लगभग 1 लाख 75 हजार गौवंश थे। वर्तमान में 697 पंजीकृत गौशालाएं
संचालित हैं, जिनमें लगभग 4 लाख बेसहारा गौवंश को आश्रय दिया जा रहा है। सरकार द्वारा 330 गौशालाओं में सौर ऊर्जा संयंत्र स्थापित किए जा चुके हैं और
वर्ष 2026-27 तक सभी पंजीकृत गौशालाओं को सौर ऊर्जा आधारित बनाने का लक्ष्य रखा गया
है। गौशालाओं को 2 रुपये प्रति यूनिट की दर से बिजली उपलब्ध करवाई जा रही है। साथ ही,
ई-रिक्शा उपलब्ध करवाने की प्रक्रिया जारी है, जिससे गौशालाएं अपने उत्पादों का विपणन
कर आय बढ़ा सकें।
पंचगव्य आधारित उत्पाद जैसे जैविक खाद, प्राकृतिक पेंट, दीया, धूपबत्ती, गोबर
के गमले और गो अर्क के निर्माण हेतु 101 गौशालाओं को मशीनरी के लिए अनुदान दिया गया
है। पंचकूला स्थित हरियाणा गोवंश अनुसंधान केंद्र में अनुसंधान एवं विकास कार्य किए
जा रहे हैं।
गौवंश के स्वास्थ्य परीक्षण के लिए नियमित पशु चिकित्सकों की तैनाती की जा रही
है। बड़ी गौशालाओं में सप्ताह में एक दिन पशु चिकित्सक तथा छोटी गौशालाओं में वीएलडीए
की सेवाएं सुनिश्चित की गई हैं। मोबाइल पशु चिकित्सालय सुविधा भी उपलब्ध है।
बेसहारा गौवंश से मुक्ति के उद्देश्य से दो गौ-अभयारण्य स्थापित किए गए हैं।
देसी नस्लों हरियाणा, साहिवाल और बेलाही के संरक्षण हेतु 5 हजार से 20 हजार रुपये तक
प्रोत्साहन राशि दी जा रही है। राष्ट्रीय गोकुल मिशन के माध्यम से नस्ल सुधार और संरक्षण
पर विशेष बल दिया जा रहा है। हरियाणा गौ-वध संरक्षण एवं गोसंवर्धन अधिनियम-2015 के
तहत गौवंश सुरक्षा के लिए सख्त कानूनी प्रावधान लागू हैं। सरकार ने समाज से गौशालाओं
के संचालन में सक्रिय सहयोग की अपील की।
हिन्दुस्थान समाचार / नरेंद्र शर्मा परवाना