हिसार में हड़ताल पर गए पालिका कर्मी, कामकाज प्रभावित
शहर में कई क्षेत्रों की सफाई व्यवस्था भी हुई
प्रभावित
हिसार, 01 मई (हि.स.)। सरकार द्वारा पालिका कर्मचारियों
की मांगों व समस्याओं का लंबे समय से हल न किए जाने के रोषस्वरूप कर्मचारियों ने शुक्रवार
से दो दिवसीय हड़ताल शुरू कर दी। हड़ताल के पहले दिन नगर निगम में कामकाज लगभग ठप रहा
वहीं शहर की सफाई व्यवस्था भी प्रभावित हुई। कर्मचारियों ने हड़ताल के दौरान जमकर नारेबाजी
की और आरोप लगाया कि उनकी मांगों व समस्याओं पर ध्यान नहीं दिया जा रहा है। हड़ताल
के दौरान कर्मचारी नगर निगम कार्यालय में धरने पर बैठ गए और सरकार के खिलाफ नारेबाजी
की।
नगर पालिका कर्मचारी संघ के जिला प्रधान सुरेंद्र
उर्फ गोलू का कहना है कि यह हड़ताल एक और दो मई को प्रदेशभर के नगर निगमों, नगर पालिकाओं
और नगर परिषदों में हो रही है। उन्होंने कहा कि कच्चे कर्मचारियों को नियमित करने,
न्यूनतम वेतन लागू करने और ठेका प्रथा समाप्त करने जैसी मांगों पर सरकार से कई दौर
की बातचीत हो चुकी है, लेकिन कोई ठोस समाधान नहीं निकला।
सर्व कर्मचारी संघ के जिला प्रधान अशोक सैनी
ने बताया कि हाईकोर्ट भी कच्चे कर्मचारियों के पक्ष में फैसले दे चुका है। उन्होंने
उल्लेख किया कि पूर्व में हाईकोर्ट ने 10 साल से कार्यरत कर्मचारियों को नियमित करने
के निर्देश दिए थे, जबकि 2016 में सुप्रीम कोर्ट ने समान काम के लिए समान वेतन की बात
कही थी। इसके बावजूद सरकार इन फैसलों को लागू नहीं कर रही है, जिसे उन्होंने कोर्ट
के आदेशों की अवहेलना बताया। कर्मचारी नेताओं ने आरोप लगाया कि नगर निगमों में हजारों
पद खाली पड़े हैं, लेकिन नई भर्तियां नहीं की जा रही हैं। इससे मौजूदा कर्मचारियों
पर काम का बोझ बढ़ रहा है और वे मानसिक दबाव का सामना कर रहे हैं। उन्होंने चेतावनी
दी कि यदि उनकी मांगें जल्द पूरी नहीं हुईं तो आंदोलन को और तेज किया जाएगा।
हड़ताल के दौरान फरीदाबाद में ड्यूटी के दौरान
जान गंवाने वाले फायर कर्मियों के परिवारों को आर्थिक सहायता और नौकरी देने की मांग
भी प्रमुखता से उठाई गई। कर्मचारियों ने बताया कि प्रदेशभर में फायर विभाग के कर्मचारी
भी अपनी मांगों को लेकर हड़ताल पर हैं, जिनकी सरकार अनदेखी कर रही है। कर्मचारी नेताओं
ने बताया कि हाल ही में चंडीगढ़ में प्रधान सचिव अशोक मीणा के साथ 17 सूत्रीय मांगों
पर बातचीत हुई थी, लेकिन कोई ठोस आश्वासन नहीं मिला। कर्मचारियों ने चेतावनी दी है
कि यदि सरकार ने जल्द समाधान नहीं किया तो वे आरपार की लड़ाई के लिए तैयार हैं।
हड़ताल के दौरान कर्मचारियों ने मुख्य मांगों
का जिक्र किया। इनमें मुख्य रूप से कच्चे, अनुबंधित और आउटसोर्स कर्मचारियों को पॉलिसी
बनाकर पक्का किया जाए, समान काम के लिए समान वेतन और बकाया एरियर का भुगतान किया जाए,
ठेका प्रथा खत्म कर कर्मचारियों को विभागीय रोल पर लिया जाए, सफाई और सीवर कर्मचारियों
का न्यूनतम वेतन 30 हजार रुपए किया जाए, सभी कर्मचारियों को कैशलेस मेडिकल सुविधा और
अन्य भत्ते दिए जाए, खाली पदों पर स्थायी भर्ती और नए पद सृजित किए जाएं, फायर विभाग
के मृत कर्मचारियों के परिवार को एक करोड़ मुआवजा और आश्रित को नौकरी दी जाए तथा पुरानी
पेंशन बहाल की जाए, जोखिम भत्ते और अन्य सुविधाएं बढ़ाई जाएं।
हिन्दुस्थान समाचार / राजेश्वर