हिसार :एसपी की पहल से पुलिस लाइन में बुजुर्गों को मिला अपना ठिकाना

 


पुलिस परिवार के वरिष्ठ नागरिकों के लिए बनाया

गया आधुनिक विश्राम स्थल

बुजुर्गों को मिला अपना ठिकाना, अब सुकून और सम्मान

के साथ बिताएंगे समय

हिसार, 27 जुलाई (हि.स.)। पुलिस लाइन में रहने

वाले पुलिस कर्मचारियों के बुजुर्ग माता-पिता के लिए सोमवार का दिन खास रहा। वर्षों

से आपस में बैठकर बातचीत करने और समय बिताने के लिए एक सुविधाजनक स्थान की जरूरत महसूस

कर रहे वरिष्ठ नागरिकों की यह इच्छा आखिरकार पूरी हो गई। हिसार पुलिस ने उनके लिए पुलिस

लाइन परिसर में एक आधुनिक वरिष्ठ नागरिक विश्राम स्थल तैयार किया है, जहां अब वे आरामदायक

और आत्मीय वातावरण में अपना समय व्यतीत कर सकेंगे।

विश्राम स्थल का शुभारंभ होने के बाद बड़ी संख्या

में बुजुर्ग वहां पहुंचे। किसी ने अपने पुराने साथियों के साथ बैठकर बातचीत की तो कोई

लंबे समय बाद खुले और सुविधाजनक माहौल में सुकून के पल बिताता नजर आया। बुजुर्गों के

चेहरों पर खुशी साफ दिखाई दे रही थी। उन्होंने कहा कि यह केवल बैठने की जगह नहीं, बल्कि

उनके सम्मान और अपनत्व का प्रतीक है। उन्होंने इस पहल के लिए हिसार पुलिस का आभार व्यक्त

करते हुए इसे पुलिस परिवार के प्रति संवेदनशील सोच का उदाहरण बताया।

पुलिस लाइन परिसर में बनाए गए इस विश्राम स्थल

में बुजुर्गों की सुविधा का विशेष ध्यान रखा गया है। यहां विशाल शेड के नीचे बैठने

के लिए कुर्सियों और लकड़ी के तख्तों की व्यवस्था की गई है। गर्मी से राहत के लिए पंखे

और कूलर लगाए गए हैं, जबकि स्वच्छ एवं ठंडे पेयजल के लिए वाटर कूलर भी स्थापित किया

गया है। पूरी व्यवस्था इस उद्देश्य से की गई है कि वरिष्ठ नागरिक बिना किसी असुविधा

के एक-दूसरे के साथ समय बिता सकें।

पुलिस कर्मियों के परिवारों ने भी इस पहल की सराहना

करते हुए कहा कि ड्यूटी की व्यस्तता के बीच यह सुविधा उनके बुजुर्ग अभिभावकों के लिए

बड़ी राहत साबित होगी। इससे उन्हें घरों तक सीमित रहने के बजाय सामाजिक वातावरण मिलेगा

और वे अपने हमउम्र लोगों के साथ समय बिता सकेंगे।

पुलिस अधीक्षक सिद्धांत जैन ने बताया कि पुलिस

लाइन में रहने वाले कई पुलिस कर्मचारियों के वृद्ध माता-पिता ने आपसी बैठने और समय

व्यतीत करने के लिए एक स्थान की आवश्यकता जताई थी। उनकी मांग को गंभीरता से लेते हुए

यह विश्राम स्थल तैयार कराया गया है।

हिन्दुस्थान समाचार / राजेश्वर