अब हरियाणा के गांवों में भी मिलेगा ‘मेडिसिटी का इलाज’

 


छोटे शहरों के सरकारी अस्पताल बनेंगे मातृ-शिशु देखभाल के हाईटेक सेंटर

चंडीगढ़, 26 मई (हि.स.)। हरियाणा की महिलाओं और नवजात बच्चों के लिए राहत भरी खबर है। अब प्रसव और नवजात इलाज के लिए बड़े शहरों के महंगे अस्पतालों के चक्कर कम लगेंगे, क्योंकि सरकार ग्रामीण इलाकों के सरकारी अस्पतालों को ही आधुनिक सुविधाओं से लैस करने जा रही है।

प्रदेश की स्वास्थ्य मंत्री आरती सिंह राव ने मंगलवार को एक बड़े हेल्थ मिशन का ऐलान करते हुए बताया कि हरियाणा स्वास्थ्य विभाग जल्द ही मेदांता फाउंडेशन के साथ समझौता ज्ञापन (एमओयू) करेगा। इस साझेदारी के जरिए अटेली, फर्रुखनगर और मीरपुर के सरकारी अस्पतालों में मातृ एवं शिशु स्वास्थ्य सेवाओं का बड़ा अपग्रेड किया जाएगा। सरकार की कोशिश है कि गांव की मां और नवजात को भी वही सुविधा मिले, जो बड़े निजी अस्पतालों में मिलती है।

इस नई पीपीपी (पब्लिक-प्राइवेट पार्टनरशिप) योजना के तहत अटेली के सब-डिस्ट्रिक्ट हॉस्पिटल और फर्रुखनगर व मीरपुर के सीएचसी में प्रसूति सेवाओं को आधुनिक बनाया जाएगा। लेबर रूम को हाईटेक सुविधाओं से लैस किया जाएगा, जबकि सी-सेक्शन ऑपरेशन थिएटरों को भी नए उपकरणों और बेहतर इंफ्रास्ट्रक्चर से मजबूत किया जाएगा।

नवजात शिशुओं की देखभाल के लिए विशेष यूनिट तैयार होंगी ताकि जन्म के बाद किसी भी आपात स्थिति में तुरंत इलाज मिल सके। इसके अलावा अत्याधुनिक डायग्नोस्टिक सेवाएं, एम्बुलेंस सपोर्ट और प्रशिक्षित मेडिकल स्टाफ की उपलब्धता सुनिश्चित करने पर भी जोर रहेगा। सरकार केवल अस्पतालों की दीवारें चमकाने तक सीमित नहीं रहना चाहती। स्वास्थ्य मंत्री आरती सिंह राव ने कहा कि यह पहल ग्रामीण स्वास्थ्य सेवाओं की तस्वीर बदलने वाली साबित होगी।

यह एमओयू शुरुआत में तीन वर्षों के लिए लागू किया जाएगा। सरकार को उम्मीद है कि समझौते के तुरंत बाद अटेली में असर दिखना शुरू हो जाएगा, जबकि छह महीने के भीतर फर्रुखनगर और मीरपुर के अस्पतालों में भी नई स्वास्थ्य सुविधाएं जमीन पर नजर आने लगेंगी।

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हिन्दुस्थान समाचार / संजीव शर्मा