हिसार में बेटी की गवाही से पत्नी की हत्या करने वाले को उम्र कैद
चिकित्सकीय
और परिस्थितिजन्य साक्ष्यों से भी हुई पुष्टि
हिसार, 25 अगस्त (हि.स.)। हिसार की अतिरिक्त सत्र
न्यायाधीश-कम-जज, विशेष न्यायालय, महिलाओं के विरुद्ध जघन्य अपराध की अदालत ने पत्नी
सुमन देवी की हत्या के मामले में आरोपी सुरेश को दोषी करार देते हुए उम्रकैद और एक
लाख रुपये जुर्माने की सजा सुनाई है। अदालत ने 19 अगस्त को आरोपी को हत्या के अपराध
में दोषी ठहराया था, जिन्हें मंगलवार को सजा सुनाई गई।
शिकायतकर्ता राम कुमार की ओर से अधिवक्ता मनोज
कुश ने बताया कि मामला स्टेट ऑफ हरियाणा बनाम सुरेश के संबंध में दो जुलाई 2024 को
दर्ज हुआ। अभियोजन पक्ष की सहायता करते हुए अदालत में मौखिक, चिकित्सकीय और परिस्थितिजन्य
साक्ष्यों को प्रभावी ढंग से रखा।मामले की सुनवाई के दौरान शिकायतकर्ता की ओर से आगे
की जांच के लिए आवेदन भी दिया गया था। अदालत ने आवेदन स्वीकार करते हुए आगे की जांच
के निर्देश दिए। इसके बाद महत्वपूर्ण गवाहों के बयान और अन्य अतिरिक्त साक्ष्य रिकॉर्ड
पर आए, जिससे अभियोजन के मामले को मजबूती मिली।
अदालत ने मृतका की नाबालिग बेटी नैंसी की गवाही
को विशेष रूप से महत्वपूर्ण माना।
अदालत के अनुसार, गवाह ने घटना से जुड़ी महत्वपूर्ण
परिस्थितियों को प्रत्यक्ष रूप से देखा था और उसकी गवाही में ऐसा कोई महत्वपूर्ण विरोधाभास
नहीं मिला, जिससे उसकी विश्वसनीयता प्रभावित हो। उसकी गवाही की पुष्टि पोस्टमार्टम
रिपोर्ट में दर्ज चोटों और अन्य परिस्थितिजन्य साक्ष्यों से भी हुई। अदालत ने मामले
की प्रारंभिक जांच में गंभीर कमियां पाए जाने और कुछ महत्वपूर्ण साक्ष्य समय पर एकत्र
नहीं किए जाने की बात भी कही। इसी वजह से आगे की जांच आवश्यक हुई। अतिरिक्त जांच के
बाद सामने आए साक्ष्यों का मूल्यांकन करते हुए अदालत ने माना कि आरोपी के खिलाफ परिस्थितियों
की पूरी और अखंड कड़ी स्थापित होती है तथा उपलब्ध साक्ष्यों से हत्या का अपराध संदेह
से परे साबित होता है।
हालांकि, अदालत ने भारतीय न्याय संहिता की धारा
85 के तहत लगाए गए आरोप को अभियोजन द्वारा सिद्ध नहीं किए जाने पर आरोपी सुरेश को इस
आरोप से बरी कर दिया। इसके बावजूद पत्नी सुमन देवी की हत्या के मामले में बीएनएस की
धारा 103(1) के तहत दोष सिद्ध होने पर उसे उम्रकैद और एक लाख रुपये जुर्माने की सजा
सुनाई गई।
हिन्दुस्थान समाचार / राजेश्वर