हिसार : भारतीय ज्ञान परंपरा को समकालीन शिक्षा से जोड़ना समय की आवश्यकता : प्रो. केसी शर्मा

 


गुजविप्रौवि में भारतीय ज्ञान परंपरा में सामग्री विकास पर कार्यशाला आयोजित

कार्यशाला में 290 प्रतिभागियों ने लिया भाग

हिसार, 15 अक्टूबर (हि.स.)। भारतीय ज्ञान परंपरा की समृद्ध ज्ञान-संपदा को

समकालीन शिक्षा, विज्ञान, तकनीकी और कौशल विकास से जोड़ते हुए शोधपरक, प्रमाणिक एवं

गुणवत्तापूर्ण शैक्षिक सामग्री विकसित करना समय की आवश्यकता है। यह बात हरियाणा राज्य उच्च शिक्षा परिषद के अध्यक्ष प्रो. केसी शर्मा ने गुरुवार काे गुरु

जम्भेश्वर विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी विश्वविद्यालय में आयोजित कार्यशाला में कही। इस अवसर पर विश्वविद्यालय के कुलसचिव

डॉ. विजय कुमार भी उपस्थित रहे।

विश्वविद्यालय

और हरियाणा राज्य उच्च शिक्षा परिषद के संयुक्त तत्वावधान में भारतीय ज्ञान परंपरा

में सामग्री विकास विषय पर एक दिवसीय संकाय कार्यशाला आयोजित की गई। इसमें 290 प्रतिभागियों

ने पंजीकरण करवाया और प्रदेश के विभिन्न विश्वविद्यालयों एवं महाविद्यालयों के शिक्षकों

ने भाग लिया। कार्यशाला के मुख्य अतिथि प्रो. केसी शर्मा ने कहा कि भारतीय दृष्टिकोण में

शिक्षा का उद्देश्य व्यक्ति के समग्र विकास के साथ समाज और राष्ट्र के निर्माण में

उसकी सार्थक भूमिका सुनिश्चित करना है। भारतीय ज्ञान एवं शिक्षा पद्धति में मानवीय

मूल्यों, सामाजिक उत्तरदायित्व, कौशल, नैतिकता और जीवन दृष्टि का समन्वय रहा है। प्राचीन

भारतीय ज्ञान को आधुनिक तकनीकी परिवेश से जोड़कर उसका सकारात्मक और विवेकपूर्ण उपयोग

नई पीढ़ी तक पहुंचाना आवश्यक है। उन्होंने कहा कि ज्ञान की पवित्रता, अध्यात्म सम्मत

विज्ञान, कौशल विकास और नैतिक चेतना भारतीय शिक्षा की विशिष्ट विशेषताएं रही हैं।

हरियाणा केंद्रीय विश्वविद्यालय के सम-कुलपति प्रो. पवन कुमार शर्मा ने मुख्य

वक्ता के रूप में भारतीय ज्ञान परंपरा की वर्तमान संदर्भों में प्रासंगिकता विषय पर

व्याख्यान दिया। उन्होंने कहा कि भारतीय ज्ञान परंपरा मानवीय सभ्यता के विकास की समृद्ध

परंपरा है। तक्षशिला और नालंदा जैसे ज्ञान केंद्रों ने विश्व को ज्ञान की व्यापक परंपरा

प्रदान की। मंडन मिश्र और आदि शंकराचार्य जैसे मनीषियों के चिंतन ने भारतीय दर्शन को

गहराई और व्यापकता दी। कार्यशाला के संयोजक प्रो. संदीप राणा ने स्वागत संबोधन में कहा कि भारतीय

ज्ञान परंपरा को समकालीन शिक्षा की आवश्यकताओं से जोड़ने के लिए प्रमाणिक, शोधपरक और

विद्यार्थी केंद्रित सामग्री विकसित करना जरूरी है। उन्होंने भारत रत्न डॉ. एपीजे अब्दुल

कलाम की जयंती के अवसर पर भारतीय ज्ञान परंपरा के संदर्भ में उनके योगदान को भी याद

किया। डॉ. तरुणा ने सत्र का संचालन किया।

कार्यशाला के विभिन्न सत्रों के समन्वय एवं संचालन में प्रो. राजीव कुमार,

डॉ. मनी श्रेष्ठ, डॉ. आज्ञाराम पांडेय, डॉ. सुनील शर्मा, डॉ. निधि तुरान, डॉ. गुंजन

मुंजाल और डॉ. गार्गी बूरा ने महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। इनमें प्रो. राजीव कुमार विधि

संकाय के अधिष्ठाता हैं।

हिन्दुस्थान समाचार / राजेश्वर