ड्रोन दीदी बनकर किसानों के खेतों में छिड़काव कर रही नूंह की लक्ष्मी
नूंह, 30 सितंबर (हि.स.)। केंद्र सरकार की ड्रोन दीदी योजना ग्रामीण महिलाओं को आधुनिक कृषि तकनीक से जोड़ने के साथ-साथ उन्हें रोजगार और आत्मनिर्भरता के नए अवसर उपलब्ध करा रही है। नूंह जिले के बसई खानजादा गांव की लक्ष्मी इस योजना से जुड़कर ड्रोन पायलट बनी हैं और आसपास के 8 से 10 गांवों में किसानों के खेतों में ड्रोन के माध्यम से कीटनाशक एवं उर्वरक का छिड़काव कर स्वरोजगार हासिल कर रही हैं।
उपायुक्त अखिल पिलानी ने बुधवार को बताया कि जिला प्रशासन की ओर से महिलाओं को आधुनिक तकनीक, स्वरोजगार और आत्मनिर्भरता से जोड़ने वाली सरकारी योजनाओं का लाभ पात्र लोगों तक पहुंचाने के लिए लगातार प्रयास किए जा रहे हैं। उन्होंने कहा कि ड्रोन दीदी जैसी योजनाओं के माध्यम से ग्रामीण महिलाओं को अपने गांव और आसपास के क्षेत्रों में ही रोजगार के नए अवसर मिल रहे हैं। महिलाएं आधुनिक तकनीक का इस्तेमाल कर अपनी आय बढ़ाने के साथ कृषि क्षेत्र में भी योगदान दे रही हैं।
बसई खानजादा निवासी लक्ष्मी 12वीं कक्षा तक शिक्षित हैं। करीब नौ वर्ष पहले वह हरियाणा राज्य ग्रामीण आजीविका मिशन के तहत गठित स्वयं सहायता समूह से जुड़ी थीं। स्वयं सहायता समूह की बैठकों और विभिन्न आजीविका गतिविधियों में सक्रिय भागीदारी के बाद जनवरी 2024 में उन्हें ड्रोन दीदी योजना के तहत ड्रोन पायलट का प्रशिक्षण लेने का अवसर मिला। प्रशिक्षण पूरा करने के बाद उन्हें गरुड़ एयरोस्पेस कंपनी का कृषि ड्रोन उपलब्ध कराया गया।
लक्ष्मी ने बताया कि वह ड्रोन के माध्यम से आसपास के करीब 8 से 10 गांवों में किसानों के खेतों में कम समय में कीटनाशक एवं उर्वरक का छिड़काव कर रही हैं। उन्होंने बताया कि पहले जिस कार्य को पूरा करने में चार से पांच मजदूरों को पूरा दिन लग जाता था, वही कार्य ड्रोन की मदद से करीब 30 से 40 मिनट में पूरा हो जाता है। इससे किसानों के समय और लागत दोनों की बचत हो रही है। उन्होंने बताया कि ड्रोन संचालन उनके लिए आय का नया साधन बन गया है। वर्ष 2025 में उन्होंने करीब 60 हजार रुपये तथा वर्ष 2026 में अब तक करीब 75 हजार रुपये की आय अर्जित की है। ड्रोन प्रशिक्षण और रोजगार मिलने से उनकी आर्थिक स्थिति मजबूत हुई है और समाज में उनकी नई पहचान बनी है।
लक्ष्मी ने अपने अनुभव साझा करते हुए बताया कि पहले उनकी आय का कोई निश्चित साधन नहीं था और वह घर तक ही सीमित थीं। ड्रोन प्रशिक्षण प्राप्त करने के बाद जब उन्होंने खेतों में ड्रोन से छिड़काव का कार्य शुरू किया तो आसपास के गांवों में लोग उन्हें ‘ड्रोन दीदी’ के नाम से पहचानने लगे। इससे उनका आत्मविश्वास बढ़ा और उन्हें परिवार की जरूरतों में आर्थिक सहयोग करने का अवसर मिला।
उन्होंने कहा कि ड्रोन दीदी योजना ने उन्हें रोजगार के साथ-साथ आत्मविश्वास और समाज में सम्मान भी दिलाया है। लक्ष्मी ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी, हरियाणा सरकार और जिला प्रशासन का आभार व्यक्त करते हुए कहा कि आधुनिक तकनीक से जुड़कर ग्रामीण महिलाएं भी आत्मनिर्भर बन सकती हैं और अपने परिवार की आर्थिक स्थिति मजबूत करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकती हैं।
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हिन्दुस्थान समाचार / अनिल मोहानिया