सिरसा: भारतीय संस्कृति विश्व की सर्वश्रेष्ठ संस्कृति: कुलपति डा. अमित आर्य
सिरसा, 16 अप्रैल (हि.स.)। दादा लख्मी चंद स्टेट यूनिवर्सिटी ऑफ परफॉर्मिंग एंड विजुअल आर्ट्स, रोहतक के कुलपति डा. अमित आर्य ने कहा कि भारतीय संस्कृति विश्व की सर्वश्रेष्ठ संस्कृति है और भारतीय ज्ञान परम्परा को व्यवहारिक रूप से लागू करके शिक्षा प्रणाली को और अधिक सुदृढ़ एवं प्रभावशाली बनाया जा सकता है। वर्तमान समय में शैक्षणिक संस्थानों की जिम्मेदारी बनती है कि वे अपने युवाओ की एनर्जी को चैनेलाइज करके उनके सम्पूर्ण व्यक्तित्व विकास हेतु किताबी ज्ञान के साथ-साथ उन्हें व्यवहारिक रूप से दक्ष करें। कुलपति डॉ. अमित आर्य गुरुवार को चौ. देवीलाल विश्वविद्यालय सिरसा में दो दिवसीय कलरव-द लिटरेरी फेस्टिवल को संबोधित कर रहे थे।
उन्होंने कहा कि संवेदनशीलता के बिना मनुष्य केवल मशीन के समान है। इसलिए संगीत, कला एवं साहित्य मानव जीवन के लिए अत्यंत आवश्यक हैं। ऐसे आयोजनों से विद्यार्थियों में नेतृत्व क्षमता, आत्मविश्वास एवं अभिव्यक्ति कौशल का विकास होता है। उन्होंने साहित्य और भाषा के महत्व पर प्रकाश डालते हुए कहा कि ऐसे आयोजन विद्यार्थियों की अभिव्यक्ति क्षमता को निखारते हैं तथा उनमें सृजनात्मक सोच को विकसित करते हैं। उन्होंने विद्यार्थियों को साहित्यिक गतिविधियों में बढ़-चढक़र भाग लेने के लिए प्रेरित किया।
सीडीएलयू के कुलपति प्रो. विजय कुमार ने कहा कि इस आयोजन का नाम कलरव ही इसकी सार्थकता को व्यक्त करता है। यह मंच विद्यार्थियों की प्रतिभा, उत्साह और सृजनात्मक ऊर्जा का प्रतीक है। प्रो. विजय कुमार ने कहा कि कलरव जैसे साहित्यिक महोत्सव विद्यार्थियों को अपनी प्रतिभा प्रदर्शित करने का सशक्त मंच प्रदान करते हैं। उन्होंने कहा कि भाषा और साहित्य समाज के विकास में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं और ऐसे आयोजनों से विद्यार्थियों का सर्वांगीण विकास सुनिश्चित होता है। इस मौके पर प्रो. सुल्तान ढांडा, प्रो. सुरेंद्र सिंह, प्रो. राजकुमार, प्रो. मोहम्मद काशिफ किदवई, प्रो. प्रियंका सिवाच, प्रो. मंजू नेहरा, प्रो. अशोक मलिक, प्रो. राजकुमार सिवाच, डॉ रविंद्र, डॉ अमित सहित बड़ी संख्या में विद्यार्थी उपस्थित रहे।
---------------
हिन्दुस्थान समाचार / Dinesh Chand Sharma