हाई काेर्ट ने दुष्कर्म एवं हत्या मामले में झज्जर ट्रायल काेर्ट के फैसले पर लगाई राेक

 

चंडीगढ़, 20 जनवरी (हि.स.)। हरियाणा के झज्जर जिले में पांच साल की मासूम बच्ची के साथ दुष्कर्म एवं हत्या के मामले में ट्रायल कोर्ट द्वारा दिए गए फैसले को पंजाब-हरियाणा उच्च न्यायालय ने बदल दिया। मंगलवार को उच्च न्यायालय ने दोषी विनोद उर्फ मुन्ना को सुनाई गई फांसी की सजा को रद्द कर दिया है। जस्टिस अनूप चितकारा और जस्टिस सुखविंदर कौर की खंडपीठ ने मामले में प्रक्रियात्मक खामियां पाते हुए इसे दोबारा ट्रायल के लिए भेजने का निर्णय लिया है।

वारदात 21 दिसंबर 2020 को झज्जर के छावनी एरिया में हुई थी। यहां एक राजमिस्त्री अपने परिवार के साथ रहता था। उनके पास ही 26 साल का विनोद कुमार उर्फ मुन्ना भी रहता था। उसने बच्ची का अपहरण किया और रेप के बाद हत्या कर दी। पांच साल की बच्ची का रेप कर मर्डर करने का यह केस झज्जर में अतिरिक्त जिला एवं सत्र न्यायाधीश हेमराज की फास्ट ट्रैक कोर्ट ने सभी सबूतों को देखते हुए सोमवार 29 नवंबर, 2021 को वारदात के 11 महीने बाद विनोद उर्फ मुन्ना को दोषी ठहराते हुए विनोद को फांसी की सजा सुनाई, जिसे न्यायालय में चुनौती दी गई।

सुनवाई के दौरान यह बात सामने आई कि डीएनए रिपोर्ट और अन्य महत्वपूर्ण फोरेंसिक साक्ष्य आरोपित के सामने स्पष्ट रूप से नहीं रखे गए थे। आरोपित को इन साक्ष्यों पर अपना पक्ष रखने या स्पष्टीकरण देने का अवसर नहीं मिला, जिसे उच्च न्यायालय ने 'ट्रायल का दूषित होना' करार दिया। ट्रायल कोर्ट ने आरोपित के समक्ष सभी आपराधिक परिस्थितियां नहीं रखी, जो कानूनी प्रक्रिया के तहत अनिवार्य है। उच्च न्यायालय के आदेश के बाद अब यह मामला वापस झज्जर में अदालत में जाएगा।

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हिन्दुस्थान समाचार / संजीव शर्मा