हरियाणा: झज्जर व अंबाला में सांप के काटने के सर्वाधिक मामले

 

चंडीगढ़, 19 सितंबर (हि.स.)। हरियाणा में सांप के काटने के मामलों में समय पर एंटी-स्नेक वेनम (एएसवी) दिए जाने से इस वर्ष अब तक लगभग 473 सर्पदंश पीड़ितों की जान बचाई जा चुकी है। झज्जर और अंबाला जिलों में सर्पदंश के सबसे अधिक मामले सामने आए हैं। यह जानकारी स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण विभाग की अतिरिक्त मुख्य सचिव डॉ. सुमिता मिश्रा ने शनिवार को चंडीगढ़ में दी।

डॉ. सुमिता मिश्रा ने बताया कि सर्पदंश के उपचार के लिए जीवन रक्षक एंटी-स्नेक वेनम प्रदेश के सभी प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्रों (पीएचसी), सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्रों (सीएचसी) और नागरिक अस्पतालों में नि:शुल्क उपलब्ध करवाया जा रहा है। दवा की पर्याप्त उपलब्धता सुनिश्चित करने के लिए इसके स्टॉक की निरंतर निगरानी की जा रही है। स्वास्थ्य विभाग के अनुसार, पिछले पांच वर्षों में प्रदेश में सांप के काटने के 1,526 पीड़ितों का उपचार किया गया है। अब सर्पदंश के अधिकतर पीड़ित सीधे अस्पताल पहुंच रहे हैं और झाड़-फूंक, तांत्रिक उपचार अथवा अन्य पारंपरिक उपायों पर निर्भरता कम हुई है। ऐसे उपायों के कारण उपचार में होने वाली देरी कई बार पीड़ित के लिए गंभीर साबित हो सकती है।

डॉ. सुमिता मिश्रा ने लोगों से अपील की कि सांप के काटने पर बिना समय गंवाए चिकित्सा सहायता प्राप्त करें। सांप के काटने के बाद शुरुआती समय बेहद महत्वपूर्ण होता है। पीड़ित को शांत रखें, उसके अनावश्यक आवागमन को रोकें तथा जिस अंग पर सांप ने काटा है, उसे स्थिर रखते हुए हृदय के स्तर से नीचे रखें और यथाशीघ्र नजदीकी अस्पताल पहुंचाएं। विभाग ने सलाह दी है कि यदि सुरक्षित दूरी बनाए रखते हुए संभव हो तो सांप की तस्वीर ली जा सकती है, ताकि चिकित्सकों को उसकी पहचान करने में सहायता मिल सके। डॉ. सुमिता मिश्रा ने कहा कि स्वास्थ्य विभाग एंटी-स्नेक वेनम की उपलब्धता की निरंतर निगरानी के साथ-साथ जन-जागरूकता और समय पर अस्पताल पहुंचकर उपचार कराने पर विशेष जोर दे रहा है। विभाग का उद्देश्य सांप के काटने से होने वाली मौतों को जीरो लाना है।

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हिन्दुस्थान समाचार / संजीव शर्मा