नूंह:मुठभेड़ में मारे गए शाहिद के खिलाफ तीन राज्यों में दर्ज हैं 70 आपराधिक मामले
नूंह, 16 अक्टूबर (हि.स.)। पुलिस मुठभेड़ में मारे गए शाहिद उर्फ अडवाणी की आपराधिक पृष्ठभूमि को लेकर नूंह पुलिस द्वारा तीन राज्यों के रिकॉर्ड की जांच की जा रही है। पुलिस के उपलब्ध रिकॉर्ड के अनुसार, शाहिद उर्फ अडवाणी निवासी गांव खरखड़ी, थाना सदर तावड़ू के खिलाफ हरियाणा, राजस्थान और उत्तर प्रदेश में कुल 70 आपराधिक मामलों में संलिप्तता दर्ज होने की जानकारी सामने आई है। पुलिस इन मामलों का सत्यापन कर प्रत्येक मामले की वर्तमान कानूनी स्थिति और न्यायालयीन कार्रवाई का विवरण जुटा रही है।
गौरतलब है कि 15 अक्टूबर 2026 की सुबह गांव सिलानी, थाना सोहना क्षेत्र में पुलिस के साथ हुई मुठभेड़ के दौरान शाहिद घायल हो गया था। उसे उपचार के लिए अस्पताल में भर्ती कराया गया, जहां उसकी मृत्यु हो गई। पुलिस रिकॉर्ड के मुताबिक, शाहिद के खिलाफ हत्या का एक, दुष्कर्म का एक, अपहरण का एक और हत्या के प्रयास के आठ मामले दर्ज होने की जानकारी है। इसके अलावा डकैती के नौ, डकैती के प्रयास का एक, चोरी के 14 और सेंधमारी के 14 मामले भी रिकॉर्ड में दर्ज हैं।
अन्य मामलों में हरियाणा गोवंश संरक्षण एवं गोसंवर्धन अधिनियम के तहत चार, गैंगस्टर एक्ट के तहत दो, आर्म्स एक्ट के तहत एक और फिरौती का एक मामला शामिल है। इसके अतिरिक्त सरकारी कर्मचारी को चोट पहुंचाने, हिरासत से फरार होने और चोट पहुंचाने से संबंधित एक-एक मामला भी दर्ज बताया गया है। वहीं, प्रिजन एक्ट के तहत दो मामलों की प्रविष्टियां पुलिस रिकॉर्ड में उपलब्ध हैं। पुलिस रिकॉर्ड में शाहिद उर्फ अडवाणी के संबंध में घोषित अपराधी (प्रोक्लेम्ड ऑफेंडर) से जुड़ी आठ प्रविष्टियां भी दर्ज हैं। पुलिस इन प्रविष्टियों का संबंधित मामलों के साथ मिलान कर रही है, ताकि यह स्पष्ट हो सके कि उनका संबंध किन मामलों से है और उनकी कानूनी स्थिति क्या रही है।
नूंह पुलिस द्वारा हरियाणा, राजस्थान और उत्तर प्रदेश में दर्ज मामलों के रिकॉर्ड का सत्यापन किया जा रहा है। इसके तहत संबंधित थानों से अभिलेख जुटाने, मामलों की वर्तमान स्थिति का पता लगाने और न्यायालयों में चल रही कार्यवाही की जानकारी प्राप्त करने की प्रक्रिया अपनाई जा रही है।
पुलिस का उद्देश्य सभी उपलब्ध रिकॉर्ड्स का मिलान कर शाहिद उर्फ अडवाणी के आपराधिक इतिहास का सटीक और समेकित विवरण तैयार करना है। प्रत्येक मामले से संबंधित दस्तावेजों और कानूनी स्थिति की गहन जांच के बाद ही पूरे रिकॉर्ड की पुष्टि हो सकेगी।
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हिन्दुस्थान समाचार / अनिल मोहानिया