पुराने धनुष से अभ्यास करने वाली जींद की कीर्ति एशियन गेम्स में चमकी
जींद, 02 अक्टूबर (हि.स.)। जापान में चल रहे एशियन गेम्स में जींद जिले के रिटौली गांव की 20 वर्षीय तीरंदाज कीर्ति शर्मा ने शानदार प्रदर्शन करते हुए भारत को स्वर्ण पदक दिलाने में अहम भूमिका निभाई। कीर्ति शर्मा ने महिला रिकर्व टीम के फाइनल में भारत ने दक्षिण कोरिया को 5-3 से हरा कर एशियन गेम्स में इस स्पर्धा का अपना पहला स्वर्ण पदक जीता। यह जीत इसलिए भी महत्वपूर्ण रही कि दक्षिण कोरिया की टीम लंबे समय से विश्व तीरंदाजी की शीर्ष टीमों में रही है।
कीर्ति शर्मा ने 15 साल की उम्र में तीरंदाजी खेलना शुरू किया था। उस समय कीर्ति नौवीं कक्षा में थी और पिल्लूखेड़ा के एफएस कान्वेंट स्कूल में शिक्षा ग्रहण कर रही थी। उसी स्कूल में कोच उधम सिंह ने तीरंदाजी के लिए खिलाड़ी तैयार करना शुरू किया। उस टीम में कोच उधम सिंह ने कीर्ति शर्मा को भी चुना। उस समय कीर्ति शर्मा को अभ्यास के लिए धनुष की जरूरत थी।
पिता विजय शर्मा ने उस समय स्कूल से पांच हजार रुपये में कीर्ति के लिए पुराना धनुष खरीदा। उसके बाद 2022 में हजारीबाग पदमा साईं झारखंड के चयन को लेकर ट्रायल के लिए नए धनुष की जरूरत थी। इसके लिए पिता विजय शर्मा ने आढ़ती से 60 हजार रुपये उधार लेकर पटियाला से धनुष खरीदा था। बेटी का 2022 में झारखंड की साईं अकादमी में चयन हो गया था।
इसके बाद साईं की ओर से कीर्ति शर्मा को पांच लाख रुपये का धनुष अभ्यास के लिए दिलवाया गया। बेटी के स्वर्ण पदक जीतने के बाद परिवार में खुशी का माहौल है। दादा राम जुआरी, दादी भरपाई देवी, मां गुड्डी देवी ने कहा कि बेटी ने एशियन गेम्स में गोल्ड मेडल जीत कर देश का नाम रोशन किया है। उन्हें बेटी पर नाज है। अब उन्हें उम्मीद है कि बेटी कीर्ति ओलंपिक में भी देश के लिए गोल्ड मेडल जीते।
तीन एकड़ खेती करते हैं पिता विजय शर्मा
कीर्ति शर्मा के पिता विजय शर्मा तीन एकड़ खेती के किसान हैं। परिवार में आर्थिक तंगी के बावजूद उन्होंने बेटी के सपनों को आगे रखा और उसे खेलों में आगे बढ़ाया। पिता विजय शर्मा की छह बहन और तीन बुआ हैं। ऐसे में परिवार की जिम्मेदारी के साथ-साथ उनके बच्चों के पढ़ाई व खेल को जारी रखा।
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हिन्दुस्थान समाचार / विजेंद्र मराठा