आईडीएफसी फस्र्ट बैंक घोटाले के मुख्यारोपित की जमानत याचिका खारिज

 

चंडीगढ़, 21 अगस्त (हि.स.)। हरियाणा में हुए आईडीएफसी फस्र्ट बैंक एवं एयू स्मॉल फाइनेंस बैंक में हुए 657 करोड़ के घोटाले में पंचकूला स्थित सीबीआई की विशेष अदालत ने घोटाले के कथित मास्टरमाइंड ऋभव ऋषि की ज़मानत अर्जी को खारिज कर दी है।

सीबीआई ने आरोप लगाया था कि आरोपित ने हरियाणा सरकार के गबन किए गए फंड का इस्तेमाल न सिर्फ़ प्रॉपर्टी खरीदने के लिए किया बल्कि डांसर्स और एस्कॉट्र्स के साथ पार्टियों को स्पॉन्सर करने, लग्जऱी होटलों में ठहरने,विदेश यात्राएं करने के लिए भी किया। सीबीआई के वकील ने कोर्ट के सामने दलील दी कि डॉक्यूमेंट्री, बैंकिंग, इलेक्ट्रॉनिक और टेस्टिमोनियल सबूतों के बड़े ग्रुप पर आधारित जांच से यह पता चला है कि (ऋभव ऋषि) पूरी आपराधिक साजिश का मुख्य रचियता और मास्टरमाइंड है। उसने खुद इस स्कीम को सोचा, शुरुआत की, कोऑर्डिनेट किया और उसे पूरा किया, जिसके तहत हरियाणा राज्य के सरकारी फंड, जो बैंक को सौंपे गए थे, का गलत इस्तेमाल किया गया और उसके बाद उसे उसके और उसके सह-आरोपितों द्वारा कंट्रोल की जाने वाली शेल कंपनियों को दे दिया गया, जिससे निजी फायदे और इस्तेमाल के लिए बदल दिया गया।

आईडीएफसी फस्र्ट बैंक के वकील समीर सेठी ने कहा कि ऋषि ने अगस्त 2025 में आईडीएफसी फस्र्ट बैंक, सेक्टर 32, चंडीगढ़ में ब्रांच मैनेजर के पद से इस्तीफा दे दिया, और बाद में नवंबर 2025 में स्मॉल फाइनेंस बैंक में शिफ्ट हो गया, जहां उसने धोखाधड़ी की गतिविधियां जारी रखीं।

उसके काम करने के तरीके के बारे में, सीबीआई ने कहा कि उसने पहले हरियाणा सरकार के सीनियर अधिकारियों से संपर्क किया, उनके साथ क्रिमिनल साजिश में शामिल हुआ, और फिर कई डिपार्टमेंट के साथ बैंकिंग प्रपोज़ल शुरू किए। उसने यह प्रोसेस आईडीएफसी फस्र्ट बैंक के हरियाणा में सरकारी काम के लिए पैनल में आने से पहले ही शुरू कर दिया था।

सीबीआई ने आगे कहा कि फिर रिभव ऋषि ने आईडीएफसी फस्र्ट बैंक के ऑफिशियल रेट से ज़्यादा इंटरेस्ट रेट दिखाए। हरियाणा सरकार के आरोपित अधिकारियों ने साजिश को आगे बढ़ाने के लिए झूठ की जानकारी होने पर उन प्रपोज़ल को मान लिया और उस ब्रांच में इन्वेस्टमेंट किया जहां रिभव ऋषि तैनात थे।

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हिन्दुस्थान समाचार / संजीव शर्मा