बैंक घोटाले में पंचायत विभाग का अधीक्षक बर्खास्त

 

फर्जी फर्म बनाकर बैंक से मिलीभुगत कर पैसा किया ट्रांसफर

चंडीगढ़, 24 अप्रैल (हि.स.)। हरियाणा सरकार ने आईडीएफसी व एयू स्मॉल बैंक घोटाले में कार्रवाई करते हुए विकास एवं पंचायत विभाग के अधीक्षक नरेश भुवानी को नौकरी से बर्खास्त कर दिया है। यह कार्रवाई आपराधिक साजिश की विस्तृत जांच और ठोस सबूत सामने आने के बाद की गई है।

सरकारी प्रवक्ता ने शुक्रवार को बताया कि निदेशक, विकास एवं पंचायत विभाग द्वारा फरवरी 2026 में गठित एक जांच समिति ने आईडीएफसी फस्र्ट बैंक और एयू स्मॉल फाइनेंस बैंक में संचालित खातों में गड़बडिय़ों और अनियमितताओं का खुलासा किया था। समिति की रिपोर्ट और सहायक दस्तावेजों के आधार पर यह मामला आपराधिक जांच के लिए राज्य सतर्कता एवं भ्रष्टाचार निरोधक ब्यूरो को सौंपा गया। इसके बाद 23 फरवरी 2026 को पंचकूला स्थित राज्य सतर्कता एवं भ्रष्टाचार निरोधक ब्यूरो थाने में एफआईआर दर्ज की गई, जिसमें भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम और भारतीय न्याय संहिता की विभिन्न धाराओं के तहत मामला दर्ज किया गया। जांच के दौरान सामने आया कि यह मामला एक संगठित, बहु-स्तरीय वित्तीय धोखाधड़ी से जुड़ा है, जिसमें सरकारी धन को फर्जी बैंकिंग लेनदेन के जरिए ‘शेल कंपनियों’ में ट्रांसफर किया गया।

जांच में यह भी उजागर हुआ कि नरेश भुवानी ने निजी व्यक्तियों और अन्य आरोपियों के साथ मिलकर एक फर्जी फर्म बनाई, जिसका उपयोग सरकारी धन की हेराफेरी के लिए किया गया। इस फर्म के खातों से करोड़ों रुपये की राशि उनके निजी खातों में ट्रांसफर की गई, जिनका उपयोग निजी संपत्तियां खरीदने में किया गया।

राज्य सतर्कता एवं भ्रष्टाचार निरोधक ब्यूरो की रिपोर्ट के अनुसार, नरेश भुवानी को अलग-अलग तिथियों में कुल लगभग 6.45 करोड़ रुपये की राशि प्राप्त हुई। इसके अलावा, उसने कई मौकों पर नकद राशि भी स्वीकार की। 6 अप्रैल 2026 को गिरफ्तारी के बाद पूछताछ में नरेश भुवानी ने बैंक खातों के संचालन और लेन-देन में अपनी भूमिका स्वीकार की। जांच से यह स्पष्ट हुआ कि वह इस संगठित साजिश का एक अहम हिस्सा था और सह-आरोपियों, बैंक अधिकारियों तथा निजी व्यक्तियों के बीच कड़ी के रूप में काम कर रहा था।

प्रवक्ता ने बताया कि सरकार ने यह पाया कि इस मामले में गवाहों को प्रभावित करने, साक्ष्यों के साथ छेड़छाड़ करने और जांच को प्रभावित करने की आशंका प्रबल है। सरकार ने विस्तृत जांच के लिए यह मामला सीबीआई को सौंप दिया है। इन सभी परिस्थितियों को ध्यान में रखते हुए नरेश भुवानी को सेवा से बर्खास्त करने का निर्णय लिया गया है।

---------------

हिन्दुस्थान समाचार / संजीव शर्मा