एसीबी करेगी आईडीएफसी फर्स्ट बैंक घोटाले की जांच : मुख्यमंत्री
चंडीगढ़, 23 फ़रवरी (हि.स.)। हरियाणा सरकार के कुछ अधिकारियों-कर्मचारियों और आईडीएफसी फर्स्ट बैंक के कुछ अधिकारियों की मिलीभगत से हुई 590 करोड़ रुपये से अधिक की धोखाधड़ी मामले की जांच एंटी क्रप्शन ब्यूरो द्वारा की जाएगी।
सोमवार को विधानसभा में शून्यकाल के दौरान इस मुद्दे पर जमकर हंगामा हुआ। पूर्व मुख्यमंत्री व नेता प्रतिपक्ष भूपेंद्र सिंह हुड्डा ने इस मामले में आरोपित अधिकारियों व कर्मचारियों पर की गई कार्रवाई को लेकर रिपोर्ट मांगी।
मुख्यमंत्री नायब सिंह सैनी ने सदन में ऐलान किया कि सरकार इस मामले में गंभीरता से काम कर रही है। एंटी करप्शन ब्यूरो और विजिलेंस विभाग को इस मामले की जांच का जिम्मा सौंपा जा चुका है। उन्होंने कहा कि सभी विभागों व बोर्ड-निगमों को ये निर्देश भी दिए गए हैं कि प्राइवेट की बजाय सरकारी बैंकों में ही सरकार का पैसा रखा जाएगा। उन्होंने कहा कि आईडीएफसी बैंक में हुई धांधली को भी सरकार ने ही पकड़ा है। चार-पांच दिनों से सरकार इस मामले में कार्रवाई कर रही है।
उन्होंने कहा कि बैंक को 18 फरवरी डी-इंपैनल कर दिया गया है। सरकार द्वारा की गई कार्रवाई के बाद ही आईडीएफसी फर्स्ट बैंक ने सेबी को पत्र लिखकर इस पूरे मामले से अवगत करवाया है। बैंक ने अपने अधिकारियों के खिलाफ कार्रवाई भी की है। सीएम ने कहा कि सरकार दोषियों को किसी सूरत में बख्शेगी नहीं।
उन्होंने कहा कि सरकार का एक रुपया भी कहीं नहीं जाएगा। सारा पैसा सुरक्षित है और ब्याज समेत वापस आएगा। नायब सैनी ने कहा कि 590 करोड़ रुपये में से 450 करोड़ रुपये के लगभग की एफडी थी। बाकी पैसा खातों में था। सीएम ने कहा कि वित्त विभाग को जब गड़बड़ नजर आई तो हिसाब-किताब का मिलान किया गया। इसमें कमी दिखी तो कार्रवाई शुरू हुई। उन्होंने कहा कि सरकार ने पैसा भी दूसरी सरकारी बैंकों में ट्रांसफर करवा दिया है।
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हिन्दुस्थान समाचार / संजीव शर्मा