हिसार : एचएयू वैज्ञानिकों ने पहली बार की स्ट्रॉबेरी विल्ट बीमारी की पहचान
अंतरराष्ट्रीय स्तर के एल्सेवियर प्रकाशन ने
दी बीमारी को मान्यता
हिसार, 01 जून (हि.स.)। हरियाणा कृषि विश्वविद्यालय
के वैज्ञानिकों ने स्ट्रॉबेरी फसल के लिए घातक विल्ट रोग के एक नए रोग कारक फ्यूजेरियम
प्रोलिफेरेटम की पहचान की है। यह पहली बार है जब भारत में स्ट्रॉबेरी के विल्ट रोग
से संबंधित इस नए रोगजनक की पुष्टि की गई हैै। विश्वविद्यालय के कुलपति प्रो. बीआर
काम्बोज के निर्देशानुसार वैज्ञानिकों ने इस रोग के प्रबंधन के लिए कार्य शुरू कर दिया
हैं। उन्होंने बताया कि वैज्ञानिकों के द्वारा प्रयोगशाला में फफूंदीनासी एवं बायोएजेंटस
का मूल्यांकन इस रोग के प्रबंध के लिए कर लिया गया है और प्रभावी फफूंदीनासी एवं बायोएजेंटस
का प्रयोग आने वाले मौसम में प्रक्षेत्र पर इसका ट्रायल किया जाएगा। वैज्ञानिकों को
उम्मीद है कि वे जल्द ही इस दिशा में भी कामयाब होंगे।
हरियाणा कृषि विश्वविद्यालय के कुलपति प्रो.
बीआर कम्बोज ने साेमवार काे वैज्ञानिकों को इस खोज के लिए बधाई दी। उन्होंने कहा कि बदलते कृषि
परिदृश्य में विभिन्न फसलों में उभर रहे खतरों की समय पर पहचान एक महत्वपूर्ण और आवश्यक
कार्य है। प्रो. कम्बोज ने वैज्ञानिकों को बीमारी के प्रकोप पर कड़ी निगरानी और प्रक्षेत्र
पर रोग नियंत्रण के लिए तेजी से काम शुरू करने की आवश्यकता पर बल दिया। स्ट्रॉबेरी
की सफल खेती अक्सर विभिन्न जैविक कारकों से बाधित होती है जिनमें से विल्ट रोग बड़ी
चिंता का विषय है। यह खोज स्ट्रॉबेरी की खेती की सुरक्षा के लिए निगरानी और मजबूत प्रबंधन
रणनीतियों की तत्काल आवश्यकता को रेखांकित करती है।
अंतरराष्ट्रीय प्रकाशन ने दी बीमारी को मान्यता,
एचएयू के वैज्ञानिक हैं पहले शोधकर्ता
अनुसंधान निदेशक डॉ. राजबीर गर्ग ने बताया कि
एल्सेवियर एक डच शैक्षणिक प्रकाशन संस्था है जिसका इंपैक्ट फैक्टर 3.3 हैै जो वैज्ञानिक,
तकनीक और चिकित्सा सामग्री में विशेषज्ञता रखती है। इसमें प्रकाशित फिजियोंलोजिकल एंड
मोलिकुलर प्लांट पैथोलोजी में वैज्ञानिकों ने इस बीमारी की रिपोर्ट को प्रथम शोध रिपोर्ट
के रूप में प्रकाशन के लिए स्वीकार कर मान्यता दी है, जो विशेषत: पौधों की बीमारियों
के लिए पौधों में नई बीमारी को मान्यता देने वाली, अध्ययन के लिए सबसे पुराने अंतरराष्ट्रीय
वैज्ञानिक संगठनों में से एक है। यह शैक्षणिक संस्था विशेषत: पौधों की बीमारियों पर
विश्वस्तरीय प्रकाशन प्रकाशित करती है। हरियाणा कृषि विश्वविद्यालय के वैज्ञानिक देश
में इस बीमारी की खोज करने वाले सबसे पहले वैज्ञानिक हैं। इन वैज्ञानिकों ने स्ट्रॉबेरी
के विल्ट रोग पर शोध रिपोर्ट प्रस्तुत की है जिसे अंतरराष्ट्रीय स्तर पर संस्था ने
मान्यता प्रदान करते हुए अपने जर्नल में प्रकाशन के लिए स्वीकार किया है।
इन वैज्ञानिकों का रहा अह्म योगदान
विल्ट रोग के मुख्य शोधकर्ता डॉ. आदेश कुमार
ने बताया कि शोधकर्ता इस बीमारी के प्रकोप को समझने और इसके प्रभाव को कम करने के लिए
लक्षित उपाय विकसित करने में जुटे हुए हैं जिससे स्ट्रॉबेरी उत्पादन की सुरक्षा सुनिश्चित
की जा सके। एचएयू के वैज्ञानिकों अनिल कुमार सैनी, रूमी रावल, राकेश कुमार, केसी राजेश
कुमार, सुशील शर्मा, विकास कुमार शर्मा, योगेश कुमार, आरपीएस दलाल, प्रिंस, इंदु अरोड़ा,
राकेश गहलोत व पीएचडी छात्र शुभम सैनी ने भी इस शोधकार्य में योगदान दिया।
हिन्दुस्थान समाचार / राजेश्वर