आयुर्वेद में आधुनिक पद्धति का विशेष महत्व : के.अय्यन्नार
-आईसीसीआर के क्षेत्रीय निदेशक ने किया राष्ट्रीय आयुर्वेद संस्थान का दौरा
चंडीगढ़, 17 जनवरी (हि.स.)। भारतीय सांस्कृतिक संबंध परिषद (इंडियन कौंसिल फॉर कल्चरल रिलेशन-आईसीसीआर) के क्षेत्रीय निदेशक के.अय्यन्नार ने कहा है कि आयुर्वेद भारत की पुरातन सभ्यता का प्रतीक है। प्राचीन काल में ऋषि मुनी जिस पद्धति से उपचार करते थे अब उसे आधुनिक रूप में बढ़ावा देकर राष्ट्रीय आयुर्वेद संस्थान में चिकित्सक तैयार किए जा रहे हैं। यह भारतीय ही नहीं विदेशी छात्र भी प्रशिक्षण हासिल कर रहे हैं।
आईसीसीआर क्षेत्रीय निदेशक के.अय्यन्नार ने राष्ट्रीय आयुर्वेद संस्थान का दौरा करने के उपरंत यहां के छात्रों से रूबरू हो रहे थे। यहां पहुंचने पर उप चिकित्सा अधीक्षक (डीएमएस) डॉ. गौरव गर्ग ने उनका स्वागत किया। उन्होंने आयुर्वेद उपचार, शैक्षणिक, शोध एवं चिकित्सा गतिविधियों के बारे में जानकारी देते हुए बताया कि रोजाना औसतन 500 से ज्यादा मरीज ओपीडी के जरिये आयुर्वेद चिकित्सा सेवाओं का लाभ उठा रहे हैं।
दौरे के दौरान क्षेत्रीय निदेशक ने पंचकर्म चिकित्सा इकाई, ओपीडी एवं आईपीडी सेवाओं का निरीक्षण किया तथा रोगियों को दी जा रही आयुर्वेदिक चिकित्सा पद्धतियों का भी अवलोकन किया। उन्हाेंने रोगियों की देखभाल के लिए अपनाई जा रही आयुर्वेद उपचार की वैज्ञानिक पद्धति के बारे में जानकारी हासिल की। उन्होंने कहा कि आईसीसीआर के माध्यम से आयुर्वेद और भारतीय ज्ञान परंपरा को अंतरराष्ट्रीय स्तर पर पहचान दिलाने में ऐसे संस्थानों की महत्वपूर्ण भूमिका है।
संस्थान के डीन प्रभारी प्रोफेसर सतीश गंधर्व ने आईसीसीआर के क्षेत्रीय निदेशक को अवगत कराया कि छात्र आधुनिक चिकित्सा पद्धतियों की पढ़ाई करने के साथ इलाज करना भी सीख रहे हैं। उन्होंने शैक्षणिक ब्लॉक, कक्षा-कक्ष, लाईब्रेरी, छात्रावास, इंटरनेशनल छात्रावास के साथ आपरेशन थियेटर का भी अवलोकन किया और लाईब्रेरी में आधुनिक चिकित्सा पद्धति से जुड़ी किताबों के संग्रह की भी तारीफ की।
इस अवसर पर मुख्य वार्डन छात्रावास प्रोफेसर प्रह्लाद रघु, डॉ. अनूप एम और डॉ. शीन्षा प्रमुख रूप से मौजूद रहीं।
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हिन्दुस्थान समाचार / संजीव शर्मा