पोस्ट हार्वेस्ट प्रबंधन, पौध कीट नियंत्रण पर भी मास्टर डिग्री और पी.एच.डी. की होगी शुरुआत : नायब सिंह सैनी
-वर्ष 2030 तक बागवानी क्षेत्र को दोगुना व उत्पादन को तीन गुणा करने का लक्ष्य
चंडीगढ़, 28 मई (हि.स.)। हरियाणा के मुख्यमंत्री नायब सिंह सैनी ने बागवानी क्षेत्र में नवाचार को बढ़ावा देने के लिए घोषणाओं का पिटारा खोलते हुए कहा कि पोस्ट हार्वेस्ट प्रबंधन,पौध कीट नियंत्रण और रोगों के नए विषयों पर भी मास्टर डिग्री और पी.एच.डी. की शुरुआत की जाएगी। उन्होंने 14 हॉर्टिकल्चर साइंस सेंटर महाराणा प्रताप बागवानी विश्वविद्यालय को समर्पित किए और कहा कि ये केंद्र किसानों तक नवीनतम तकनीकों व गुणवत्तायुक्त पौध सामग्री पहुंचाने और वैज्ञानिक परामर्श देने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएंगे।
मुख्यमंत्री गुरुवार काे महाराणा प्रताप बागवानी विश्वविद्यालय करनाल व लेफ्टिनेंट अमित मेमोरियल फाउंडेशन की ओर से आयोजित राष्ट्रीय सम्मेलन के उद्घाटन समारोह में बतौर मुख्य अतिथि बोल रहे थे। यह राष्ट्रीय सम्मेलन अमृतकाल में बागवानी फसलों के लिए गुणवत्ता युक्त बीज एवं रोपण सामग्री का रणनितिक प्रतिमान विषय पर आधारित है।
मुख्यमंत्री ने इस समारोह में बागवानी वैज्ञानिक व प्रगतिशील किसानों को शील्ड, शाल व प्रशंसा पत्र देकर सम्मानित किया। समारोह में बागवानी विश्वविद्यालय के उप कुलपति डा. सुरेश कुमार मल्होत्रा ने मुख्यमंत्री, विधायकगण व अन्य अतिथियों को महाराणा प्रताप की मूर्ति भेट कर सम्मानित किया। उन्होंने इस अवसर पर अपने संबाेधन कहा कि भारत विश्व में फलों व सब्जियों का दूसरा सबसे बड़ा उत्पादक देश है। देश में प्रतिवर्ष लगभग 360 मिलियन टन से अधिक बागवानी उत्पादन होता है। आज भारत आम, केला, अमरूद, अनार जैसे फलों और आलू, प्याज सहित कई अन्य सब्जियों के उत्पादन में विश्व के अग्रणी देशों में शामिल है। लेकिन, यह भी सच है कि उत्पादन के बावजूद गुणवत्ता, ग्रेडिंग, रोगमुक्त पौध सामग्री और पोस्ट-हार्वेस्ट प्रबंधन की कमी के कारण हमें भारी आर्थिक नुकसान उठाना पड़ता है।
उन्होंने बताया कि महाराणा प्रताप बागवानी विश्वविद्यालय के मुख्य परिसर का शिलान्यास स्वयं देश के यशस्वी प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी द्वारा 9 दिसंबर, 2024 को किया गया था। इतने कम समय में इस विश्वविद्यालय ने जो मुकाम हासिल किया है वह असाधारण है। शिक्षा हो, अनुसंधान हो या किसान सेवा हर क्षेत्र में इस संस्थान ने अपनी अलग पहचान बनाई है। यहाँ विकसित तकनीकें, यहाँ के प्रशिक्षण कार्यक्रम और किसानों के साथ निरंतर संवाद यह सब मिलकर हरियाणा की बागवानी क्रांति को एक नई ऊर्जा, एक नई रफ्तार दे रहे हैं।
मुख्यमंत्री ने कहा कि आज पूरी दुनिया इस बात को स्वीकार कर रही है कि गुणवत्तायुक्त बीज और पौध से कृषि उत्पादकता में 15 से 25 प्रतिशत तक वृद्धि संभव है। इसलिए गुणवत्तायुक्त पौध सामग्री, वैज्ञानिक प्रबंधन और आधुनिक सप्लाई चेन पर ध्यान देने की आवश्यकता है। उन्होंने कहा कि किसानों की मेहनत और वैज्ञानिकों के अनुसंधान ने देश को खाद्यान्न में आत्मनिर्भर बनाया है। लेकिन, आज समय की मांग बदल रही है।
मुख्यमंत्री ने कहा कि इस वित्त वर्ष के बजट में सभी जिलों में स्मार्ट बागवानी तकनीकों जैसे संरक्षित खेती एरोपोनिक्स, हाइड्रोपोनिक्स, ग्रीन हाउस, वर्टिकल फार्मिंग व ई-पेस्ट के अंतर्गत कुल 1,000 एकड़ क्षेत्र को लाने का भी प्रावधान किया है। प्रदेश में ग्रामीण हाट मंडियां स्थापित की जाएगी, जिन्हें किसान उत्पादक संगठनों के पैक हाउसेस से लिंक किया जाएगा।
इन जिलों में मशरूम उत्पादन व मूल्य संवर्धन को व्यापक स्तर पर और बढ़ावा देने के लिए विशेष कार्यक्रम चलाए जाएंगे। उन्होंने कहा कि बागवानी शिक्षा को बढ़ावा देने के लिए महाराणा प्रताप बागवानी विश्वविद्यालय से संबंद्ध रीजनल रिसर्च सेंटर की स्थापना अंबाला के चाणसौली में की जाएगी। उन्होंने कहा कि यदि भारत को वैश्विक बागवानी निर्यात शक्ति बनना है तो हमें उत्पादन के साथ साथ गुणवत्ता पर भी ध्यान देना होगा। उन्होंने कहा कि मुझे पूरा विश्वास हैै कि इस राष्ट्रीय सम्मेलन में होने वाला विचार-मंथन देश की बागवानी नीति को नई दिशा देगा,अनुसंधान को नई ऊँचाई देगा और करोड़ों किसानों के हित में नए द्वार खोलेगा। यहाँ से जो संकल्प निकलेगा- वह संकल्प केवल इस सभागार तक सीमित नहीं रहेगा, वह देश के खेत-खलिहानों तक पहुंचेगा,किसान के जीवन में बदलाव लाएगा।
इस अवसर पर महाराणा प्रताप हॉर्टिकल्चर यूनिवर्सिटी करनाल के कुलपति प्रो. सुरेश मल्होत्रा ने मुख्य अतिथि नायब सिंह सैनी का स्वागत किया। इस अवसर पर एएसआरबी के चेयरमैन डॉ. संजय कुमार , भारतीय उद्यानिकी संघ परिसंघ (चाय) डॉ एच.पी. सिंह, डॉ. पाठक ने भी विचार रखे।
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हिन्दुस्थान समाचार / संजीव शर्मा