प्लॉट खरीदारों को नहीं मिली जमीन, वाटिका लिमिटेड के सीएमडी और प्रमोटर पर ईडी की कार्रवाई

 

चंडीगढ़, 30 सितंबर (हि.स.)। करोड़ों रुपये लेकर भी करीब डेढ़ दशक तक प्लाट नहीं दिए जाने पर कार्रवाई करते हुए प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) ने वाटिका लिमिटेड के चेयरमैन-कम-मैनेजिंग डायरेक्टर अनिल भल्ला और ग्रुप के प्रमोटर गौतम भल्ला को गिरफ्तार किया है।

ईडी के मुताबिक, दोनों को मनी लॉन्ड्रिंग के मामले में गिरफ्तार किया गया। जांच में सामने आया कि वाटिका लिमिटेड के आवासीय प्रोजेक्ट्स में प्लॉट खरीदने के लिए सात खरीदार संस्थाओं ने वर्ष 2010 से 2012 के बीच करीब 260 करोड़ रुपये पूरी बिक्री रकम के तौर पर जमा कराए, लेकिन वर्षों बाद भी बड़ी संख्या में प्लॉट खरीदारों को नहीं मिल सके।

ईडी के अनुसार करीब 140.73 करोड़ रुपये मूल्य के प्लॉट आज भी अनडिलीवर्ड हैं। ईडी ने वाटिका लिमिटेड, उसके प्रमोटरों अनिल भल्ला, गौतम भल्ला और गौरव भल्ला समेत अन्य के खिलाफ मनी लॉन्ड्रिंग निरोधक कानून (पीएमएलए) के तहत ईसीआईआर दर्ज की है। मामला दिल्ली पुलिस की आर्थिक अपराध शाखा (ईओडब्ल्यू) में दर्ज कई एफआईआर से जुड़ा है। इनमें धोखाधड़ी से प्रेरित कर रकम लेने, आवासीय प्लॉट की डिलीवरी नहीं करने और अन्य आरोपों की जांच की जा रही है।

जांच के मुताबिक वाटिका इंडिया नेक्स्ट के सेक्टर 84/85 और वाटिका इंडिया नेक्स्ट-2 के सेक्टर 88 ए में प्लॉट खरीदने के लिए सात खरीददार संस्थाओं ने करीब 260 करोड़ का भुगतान किया था। प्लॉट वार एग्रीमेंट 2014 में किए गए। इसके बाद प्रोजेक्ट के लेआउट में बदलाव किया गया और पहले आवंटित कई प्लॉटों के नंबर बदल दिए गए या उन्हें दूसरी जगह स्थानांतरित कर दिया गया।

ईडी के मुताबिक, वाटिका इंडिया नेक्स्ट-2 में करीब 1.10 लाख वर्ग गज का एक प्लॉट ऐसा है, जिसके लिए लगभग 90 करोड़ का भुगतान किया जा चुका था। इसके बावजूद करीब 14 साल बीतने के बाद भी इसकी डिलीवरी नहीं हुई।

वहीं, वाटिका इंडिया नेक्स्ट प्रोजेक्ट में भी खरीदारों को केवल आंशिक डिलीवरी दी गई। जांच एजेंसी का कहना है कि दोनों प्रोजेक्टों में करीब 140.73 करोड़ मूल्य के प्लॉट आज भी खरीदारों को नहीं मिले हैं। जांच में यह भी सामने आया कि प्रोजेक्ट की जमीन करीब 22 ग्रुप कंपनियों के माध्यम से रखी गई थी।

ईडी के अनुसार, इन कंपनियों के अपने कर्मचारी या स्वतंत्र कारोबारी गतिविधियां नहीं थीं। इनका इस्तेमाल मुख्य रूप से कॉरपोरेट गारंटी देने और जमीन तथा बैंक ऋण से जुड़े कामों को संभालने के लिए किया जाता था। वटिका लिमिटेड के बैंक खातों की जांच में कथित तौर पर यह भी पता चला कि खरीदारों से प्रोजेक्ट के लिए प्राप्त रकम का इस्तेमाल केवल संबंधित प्रोजेक्ट पर नहीं किया गया। रकम को दूसरी ग्रुप कंपनियों और प्रमोटर से जुड़ी ऐसी संस्थाओं में भी ट्रांसफर किया गया, जो इन प्रोजेक्टों का हिस्सा नहीं थीं।

ईडी ने वर्ष 2024 के एक अलग लेनदेन को भी जांच में शामिल किया है। इसके तहत स्केलर वेंचर्स ने एग्रीमेंट टू सेल एंड बाय-बैक एग्रीमेंट के तहत 473.18 करोड़ रुपये का भुगतान किया था।

ईडी के मुताबिक, 165 प्लॉट में से केवल 15 प्लॉट वापस खरीदे गए। इसके बाद बचे 150 में से 14 प्लॉट कथित तौर पर तीसरे पक्ष को करीब 13.62 करोड़ में बेच दिए गए। एजेंसी का आरोप है कि यह बिक्री स्केलर की जानकारी या सहमति के बिना की गई। इस मामले में फिलहाल 154.36 करोड़ की क्राइम प्रोसीड्स की पहचान की गई है।

---------------

हिन्दुस्थान समाचार / संजीव शर्मा