सरकारी जमीन के गलत मूल्यांकन पर अब सख्ती, एक लाख तक होगा जुर्माना

 

चंडीगढ़, 24 जुलाई (हि.स.)। हरियाणा सरकार ने सरकारी भूमि और अन्य परिसंपत्तियों के मूल्यांकन को पूरी तरह निष्पक्ष, पारदर्शी और जवाबदेह बनाने के लिए पैनलबद्ध मूल्यांकनकर्ताओं (वैल्यूअर्स) के लिए सख्त आचार संहिता लागू कर दी है। नई व्यवस्था के तहत गलत या पक्षपातपूर्ण मूल्यांकन, फर्जी दस्तावेज, पेशेवर कदाचार, अनावश्यक देरी अथवा हितों के टकराव की जानकारी छिपाने जैसे मामलों में संबंधित मूल्यांकनकर्ता को पैनल से हटाया जा सकेगा, उसकी फीस जब्त की जाएगी और उल्लंघन की गंभीरता के आधार पर एक लाख रुपये तक का जुर्माना भी लगाया जाएगा।

राजस्व एवं आपदा प्रबंधन विभाग की वित्तायुक्त डॉ. सुमिता मिश्रा ने बताया कि राजस्व एवं आपदा प्रबंधन विभाग द्वारा तैयार की गई यह नीति राज्य सरकार द्वारा भूमि के मूल्यांकन के लिए लगे पैनलबद्ध मूल्यांकनकर्ताओं हेतु एक समान नैतिक और पेशेवर ढांचा तय करती है।

इस आचार संहिता के तहत, प्रत्येक पैनलबद्ध मूल्यांकनकर्ता को हरियाणा भू-राजस्व अधिनियम, 1887, भारतीय स्टाम्प अधिनियम, 1899, भूमि अधिग्रहण, पुनर्वासन और पुनर्व्यवस्थापन में उचित प्रतिकर और पारदर्शिता का अधिकार अधिनियम, 2013, रियल एस्टेट (विनियमन और विकास) अधिनियम, 2016, कंपनी (पंजीकृत मूल्यांकनकर्ता और मूल्यांकन) नियम, 2017 तथा अन्य संबंधित केंद्रीय और राज्य कानूनों, नियमों, नियमावलियों और सरकारी निर्देशों के लागू प्रावधानों का पालन करना अनिवार्य होगा।

डॉ. मिश्रा ने कहा कि मूल्यांकनकर्ताओं को जहां भी लागू हो, अपने मूल संगठनों (जैसे आयकर विभाग, भारतीय स्टेट बैंक और सरकारी स्वामित्व वाली बीमा कंपनियों) द्वारा जारी दिशा-निर्देशों का भी पालन करना होगा।

इस नीति के प्रमुख प्रावधानों में से एक यह है कि प्रत्येक पैनलबद्ध मूल्यांकनकर्ता के लिए किसी भी मूल्यांकन कार्य को शुरू करने से पहले 'हितों के टकराव' की घोषणा जमा करना अनिवार्य होगा। बदलती कानूनी और पेशेवर आवश्यकताओं के अनुरूप बनाए रखने के लिए इस आचार संहिता की हर दो साल में समीक्षा भी की जाएगी।

नई नीति में पैनल से हटाने के तय किए गए मानदंड

डॉ. सुमिता मिश्रा ने बताया कि इस नीति में पैनल से हटाने के कई आधार निर्दिष्ट किए गए हैं, इनमें भूमि का कम मूल्यांकन या अधिक मूल्यांकन करना, दुर्भावनापूर्ण इरादे से मूल्यांकन रिपोर्ट तैयार करना, पेशेवर कदाचार, फर्जी बिल जमा करने जैसी धोखाधड़ी की गतिविधियों में शामिल होना, तय समय सीमा से अधिक समय तक मूल्यांकन रिपोर्ट सौंपने में देरी करना और सरकारी अधिकारियों, कर्मचारियों या प्रतिनिधियों को धमकाना, डराना या गाली देना शामिल है। एक अन्य महत्वपूर्ण प्रावधान मूल्यांकनकर्ता का स्वचालित रूप से पैनल से हट जाना है, यदि उसका पंजीकरण उसकी मूल नियामक संस्था (जैसे सेबी, आरबीआई, आयकर विभाग, एसबीआई या किसी अन्य सक्षम प्राधिकारी) द्वारा निलंबित या वापस ले लिया जाता है।

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हिन्दुस्थान समाचार / संजीव शर्मा