हरियाणा के लाखाें बिजली उपभोक्ताओं को राहत
- एचईआरसी ने एफएसए वसूली की याचिका को किया खारिज
चंडीगढ़, 01 अक्टूबर (हि.स.)। हरियाणा बिजली आयोग द्वारा बिजली निगमों की 1134.54 करोड़ रुपये की एफएसए वसूली याचिका खारिज किए जाने पर पूर्व मंत्री प्रो. संपत सिंह ने इसे प्रदेश के करीब 84 लाख बिजली उपभोक्ताओं के हित में महत्वपूर्ण फैसला बताया। उन्होंने कहा कि निगमों की देरी और प्रशासनिक लापरवाही का आर्थिक बोझ उपभोक्ताओं पर नहीं डाला जा सकता।
प्रो. सम्पत सिंह ने कहा कि उन्होंने हरियाणा विद्युत नियामक आयोग के सामने 1134.54 करोड़ रुपये की निगमों की याचिका पर ऐतराज जताया था तथा तथ्यों के साथ आयोग के सामने सुनवाई में विरोध जताया था और कहा था कि बिजली कंपनियां कानून और निर्धारित समय-सीमा की अनदेखी करके उपभोक्ताओं पर अतिरिक्त आर्थिक बोझ नहीं डाल सकती। आज उन्हें खुशी है कि आयोग ने उनकी दलीलों को मानकर 1134.54 करोड़ रुपये की वसूली की याचिका रद्द कर दीं।
उन्होंने कहा कि उत्तर हरियाणा बिजली वितरण निगम और दक्षिण हरियाणा बिजली वितरण निगम द्वारा नवंबर 2025 की एफएसए राशि की वसूली का प्रयास किया गया था। यह राशि निर्धारित समय में बिजली बिलों में नहीं जोड़ी गई, जिसके कारण जनवरी 2026 में यह राशि नियमों के अनुसार जब्त हो गई थी, फिर भी इसकी वसूली का प्रयास किया गया। आयोग द्वारा इस राशि की दोबारा वसूली की अनुमति नहीं देना उपभोक्ताओं के हित में महत्वपूर्ण फैसला है। इसलिए बिजली वितरण कंपनियों को निर्धारित नियमों और समय-सीमा का पालन करना होगा। उन्होंने कहा कि निगमों की देरी या प्रशासनिक लापरवाही का आर्थिक बोझ आम बिजली उपभोक्ताओं पर नहीं डाला जा सकता। उपभोक्ता बिजली कंपनियों की कार्यप्रणाली की कमियों की कीमत क्यों चुकाए।
प्रो. संपत सिंह ने कहा कि अभी कई महत्वपूर्ण मुद्दों पर सरकार और बिजली निगमों को जवाब देना बाकी है। वर्ष 2021 से उपभोक्ताओं को मिलने वाले कई नकारात्मक फयूल सरचार्ज एडजस्टमेंट का लाभ नहीं दिया गया। उनका जनहित में संघर्ष वित्त वर्ष 2027-28 के अनुमानित ‘वार्षिक राजस्व प्राप्तियों’ पर होने वाली आगामी सुनवाई में भी जारी रहेगा और वे निगमों के ‘‘पिछले दरवाजे से एंट्री’’ के प्रयास को हर हाल में रोकेगें। फिक्स्ड चार्ज, बढ़ते बिजली शुल्क और नगर निकायों के टैक्स से घरों तथा छोटे कारोबारों पर पडऩे वाले अतिरिक्त बोझ को कम करने के लिए आगामी वर्ष की सुनवाई में और गंभीरता से उठायेगें और सरकार को इसकी समीक्षा करने के लिए मजबूर करेगें।
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हिन्दुस्थान समाचार / संजीव शर्मा