ड्रग तस्करी पर केंद्र का जवाब, हरियाणा में निगरानी और समन्वित कार्रवाई तेज
चंडीगढ़, 05 अगस्त (हि.स.)। उत्तर भारत के कई राज्यों को जोड़ने वाले हरियाणा के सड़क नेटवर्क पर ड्रग तस्कर सक्रिय हैं। इसके चलते केंद्रीय और राज्य एजेंसियों ने भी यहां अपनी चौकसी और समन्वित कार्रवाई तेज कर दी है। लोकसभा में कांग्रेस सांसद दीपेंद्र सिंह हुड्डा के एक सवाल के लिखित जवाब में केंद्रीय गृह राज्य मंत्री नित्यानंद राय ने कहा कि ड्रग तस्कर लगातार अपने रूट और तौर-तरीके बदलते रहते हैं।
जवाब में स्पष्ट कहा गया कि इस स्थिति को देखते हुए किसी भी राज्य को स्थायी 'ड्रग ट्रांजिट कॉरिडोर' नहीं कहा जा सकता। उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि हरियाणा से गुजरने वाले अंतरराज्यीय मार्गों पर खुफिया निगरानी और संयुक्त अभियान लगातार चल रहे हैं। गृह मंत्रालय के अनुसार वर्ष 2015 से 2024 के बीच हरियाणा में 28 हजार 906 मामले एनडीपीएस अधिनियम के तहत दर्ज किए गए। वर्ष 2022 में सबसे अधिक 3,815 मामले सामने आए, जबकि 2024 में भी 3,325 केस दर्ज हुए। यह आंकड़े बताते हैं कि राज्य में मादक पदार्थों की तस्करी और उससे जुड़े अपराध अब भी कानून-व्यवस्था के लिए गंभीर चुनौती बने हुए हैं। बताया गया कि ड्रग तस्करी के नेटवर्क स्थायी नहीं होते और तस्कर लगातार अपने रास्ते बदलते रहते हैं।
ड्रग नेटवर्क पर शिकंजा कसने के लिए केंद्र ने हरियाणा, पंजाब, हिमाचल प्रदेश, चंडीगढ़ और जम्मू-कश्मीर की एजेंसियों के बीच समन्वय बढ़ाया है। गृह मंत्रालय के अनुसार फरवरी 2026 में हुई संयुक्त बैठक में ड्रग हॉटस्पॉट, एंट्री-एग्जिट प्वाइंट और तस्करी के संभावित मार्गों की समीक्षा की गई। इसके बाद राज्यों के बीच खुफिया सूचनाओं के आदान-प्रदान और संयुक्त कार्रवाई को और तेज किया गया।
वर्ष 2025 में हरियाणा में ड्रग तस्करी से जुड़ी 14.33 करोड़ रुपये की संपत्ति जब्त या फ्रीज की गई, जबकि 2026 में मई तक 6.54 करोड़ रुपये की संपत्ति पर कार्रवाई हो चुकी है। इसके अलावा 2025 में 75 और 2026 में जून तक 10 आदतन तस्करों के खिलाफ 'पीआईटी-एनडीपीएस' (मादक पदार्थों की अवैध तस्करी की रोकथाम संबंधी निरोधात्मक कानून) कानून के तहत निरोधात्मक कार्रवाई की गई।
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हिन्दुस्थान समाचार / संजीव शर्मा