हरियाणा विधानसभा में हंगामा: आठ कांग्रेस विधायक निलंबित, मार्शलों ने संभाला मोर्चा
विधानसभा गेट पर धक्का-मुक्की का कांग्रेस ने जताया विरोध की नारेबाजी
चंडीगढ़, 27 अगस्त (हि.स.)। हरियाणा विधानसभा के पहले दिन की कार्यवाही हंगामेदार रही। गुरुवार काे सदन सियासी रणक्षेत्र में बदल गया। कांग्रेस विधायकों ने सदन के भीतर जमकर नारेबाजी की। सत्ता पक्ष और विपक्ष के बीच तीखी नोक-झोक हुई, जिसके चलते कार्यवाही को स्थगित करना पड़ा। यही नहीं, विस अध्यक्ष हरविंद्र कल्याण ने कांग्रेस के 8 विधायकों को नेम कर दिया, जिन्हें मार्शलों ने बाहर निकाला।
हरियाणा विधानसभा के तीन दिवसीय मानसून सत्र की कार्यवाही गुरुवार को 11 बजे शुरू हुई। इससे पहले कांग्रेस विधायक ने हाईकोर्ट चौक से लेकर विधानसभा तक काले पकड़े पहनकर रोष स्वरूप एचकेआरएन, पेपर लीक, कानून व्यवस्था और राम मंदिर चंदा चोरी समेत कई मुद्दों को लेकर प्रदर्शन करते हुए विधानसभा पहुंचे।
कांग्रेस विधायकों ने तख्तियों और बैनर के साथ विधानसभा परिसर में प्रवेश करने पर सुरक्षा कर्मियों ने रोक लिया। इस दौरान कांग्रेस विधायकों की सुरक्षा कर्मियों के साथ कहासुनी हुई नौबत धक्का-मुक्कती तक पहुंच गई। इसके बाद यही घटनाक्रम सदन के भीतर राजनीतिक टकराव का सबसे बड़ा मुद्दा बन गया।
सदन में शोक प्रस्तावों तक कार्यवाही सामान्य रही, लेकिन इसके बाद कांग्रेस ने विधानसभा गेट पर विधायकों के साथ कथित बदसलूकी और धक्का-मुक्की का मुद्दा उठा दिया। बादली विधायक कुलदीप वत्स ने सबसे पहले विधानसभा के बाहर धक्के मारे जाने की बात उठाई। इसके बाद पूर्व मुख्यमंत्री और नेता प्रतिपक्ष भूपेंद्र सिंह हुड्डा ने मोर्चा संभाल लिया। हुड्डा ने अपनी फटी हुई शर्ट की जेब दिखाते हुए पुलिस और सुरक्षा व्यवस्था पर गंभीर सवाल उठाए।
उन्होंने कहा कि उनके साथ मिसबिहेव हुआ और सवाल किया कि क्या विधायकों को धक्के मारने के लिए ऐसे लोगों को भेजने के आदेश दिए गए थे। हुड्डा ने कहा कि वह छह बार विधायक और चार बार सांसद रह चुके हैं, लेकिन विधानसभा में इस तरह का व्यवहार उन्होंने पहले कभी नहीं देखा। पूर्व विधानसभा अध्यक्ष और बेरी विधायक डॉ. रघुबीर सिंह कादियान ने भी पुलिस के व्यवहार पर सवाल उठाए और कांग्रेस विधायकों का समर्थन किया।
विपक्ष के आरोपों पर विधानसभा अध्यक्ष हरविन्द्र कल्याण ने स्पष्ट किया कि सदन की व्यवस्था बनाए रखना और नियम-कायदों का पालन करवाना उनकी जिम्मेदारी है। उन्होंने कहा कि वह पूरे घटनाक्रम की जानकारी लेंगे और सदन को इससे अवगत कराएंगे। लेकिन स्पीकर के इस आश्वासन के बावजूद कांग्रेस विधायक शांत नहीं हुए। सत्ता पक्ष के विधायक भी अपने स्थानों पर खड़े हो गए और दोनों तरफ से नारेबाजी शुरू हो गई। देखते ही देखते सदन का माहौल पूरी तरह गर्म हो गया। बढ़ते हंगामे के बीच स्पीकर ने सदन की कार्यवाही 20 मिनट के लिए स्थगित कर दी।
कार्यवाही दोबारा शुरू हुई तो कांग्रेस ने विधानसभा गेट पर हुए घटनाक्रम को फिर से मुद्दा बना लिया। इस बार विपक्ष और ज्यादा आक्रामक नजर आया। हुड्डा समेत कांग्रेस विधायकों ने स्पीकर की भूमिका और कार्यशैली पर भी सवाल उठाए। हुड्डा ने कहा कि उन्होंने अपने लंबे राजनीतिक जीवन में ऐसा व्यवहार कभी नहीं देखा। विपक्ष की ओर से लगातार सरकार और स्पीकर के खिलाफ नारेबाजी होती रही। हालात बिगड़ते देख सदन की कार्यवाही फिर स्थगित करनी पड़ी। लगातार चेतावनियों के बावजूद कांग्रेस विधायक वेल में डटे रहे और नारेबाजी करते रहे। इसके बाद स्पीकर ने कड़ा कदम उठाते हुए कांग्रेस के आठ विधायकों को सदन की शेष अवधि के लिए नेम कर दिया। नेम किए गए विधायकों में कैथल से आदित्य सुरजेवाला, गुहला से देवेंद्र हंस, सिरसा से गोकुल सेतिया, कलानौर से शकुंतला खटक, बरोदा से इंदूराज नरवाल, कलायत से विकास सहारण, नारनौंद से जस्सी पेटवाड़ और महम से बलराम दांगी शामिल रहे।
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हिन्दुस्थान समाचार / संजीव शर्मा