कांग्रेस ने राज्यसभा चुनावों में धांधली का आराेप लगा राज्यपाल काे दिया ज्ञापन

 


हुड्डा बोले, निर्वाचन अधिकारी ने कांग्रेस के वैध वोटों को किया रद्द

चंडीगढ़, 19 मार्च (हि.स.)। राज्यसभा चुनाव में वोटिंग के दौरान कथित धांधली का आरोप लगाते हुए हरियाणा के पूर्व मुख्यमंत्री एवं नेता प्रतिपक्ष भूपेंद्र सिंह हुड्डा के नेतृत्व में हरियाणा कांग्रेस विधायक दल ने गुरुवार को राज्यपाल को एक ज्ञापन सौंपा। इस ज्ञापन में कांग्रेस ने राज्यसभा की 2 सीटों के लिए हुए चुनाव में बीजेपी व निर्वाचन अधिकारी की मिलीभगत का खुलासा किया।

ज्ञापन में कहा गया है कि हरियाणा विधानसभा में कुल 90 सदस्य हैं, जिसमें बीजेपी के 48, कांग्रेस के 37, इंडियन नेशनल लोक दल के 2 तथा 3 निर्दलीय विधायक हैं। राज्यसभा की एक सीट जीतने के लिए न्यूनतम 31 मतों की आवश्यकता थी। सामान्य परिस्थितियों में बीजेपी और कांग्रेस प्रत्येक एक सीट जीतने वाली थी, लेकिन बीजेपी ने एक अप्रत्याशित कदम उठाते हुए अपने ही उपाध्यक्ष सतीश नंदल को निर्दलीय उम्मीदवार के रूप में खड़ा कर दिया, जिसके लिए 7 बीजेपी विधायकों ने प्रस्तावक बनकर समर्थन दिया। कांग्रेस ने इसे सत्तारूढ़ दल द्वारा राजनीतिक खरीद-फरोख्त, प्रलोभन, धमकी, संस्थागत दबाव तथा सरकारी मशीनरी के दुरुपयोग का स्पष्ट उदाहरण बताया है।

ज्ञापन में कहा लगाया गया है कि निर्वाचन अधिकारी (रिटर्निंग ऑफिसर) पंकज अग्रवाल (आईएएस) ने पक्षपातपूर्ण एवं पक्षधर भूमिका निभाई। उन्होंने कांग्रेस विधायकों के वैध मतों को अवैध घोषित किया, बीजेपी एवं निर्दलीय उम्मीदवार के पक्ष में मतों को स्वीकार किया तथा कांग्रेस के मतगणना एजेंटों द्वारा दर्ज की गईं सभी वैध आपत्तियों को जानबूझकर अनदेखा कर दिया। कांग्रेस ने इस संबंध में निर्वाचन आयोग को भी शिकायत दर्ज कराई है।

कांग्रेस विधायक दल ने राज्यपाल से अनुरोध किया है कि वे राज्य के संवैधानिक संरक्षक के रूप में इस अनैतिक एवं अलोकतांत्रिक व्यवहार की जांच कराएं, सरकार को लोकतांत्रिक मूल्यों, शालीनता एवं अनुशासन का पालन करने का निर्देश दें तथा निर्वाचन अधिकारी के खिलाफ उचित अनुशासनात्मक कार्रवाई सुनिश्चित करें। राज्यपाल ने मामले का संज्ञान लेकर कार्रवाई का आश्वासन दिया है। इस मौके पर विधायक भारत भूषण बात्रा ने बताया कि बीजेपी ने चुनाव में धांधली करने की मंशा से ही तीसरा उम्मीदवार उतारा था। सतीश नांदल बीजेपी के उपाध्यक्ष हैं, बावजूद इसके उन्हें निर्दलीय उम्मीदवार का नाम दिया गया। स्पष्ट है कि दूसरा उम्मीदवार भी बीजेपी का ही था।

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हिन्दुस्थान समाचार / संजीव शर्मा