पानीपत: भावांतर भरपाई से मधुमक्खी पालकों की आय को मिलेगा स्थायित्व
पानीपत, 11 जनवरी (हि.स.)। सरकार ने मधुमक्खी पालकों के हित में एक महत्वपूर्ण और दूरदर्शी पहल की गई है। राष्ट्रीय मधुमक्खी पालन एवं हनी मिशन के तहत शहद उत्पादन को बढ़ावा देने और मधुमक्खी पालकों को आर्थिक सुरक्षा प्रदान करने के उद्देश्य से भावान्तर भरपाई योजना लागू की गई है। इस योजना के अंतर्गत शहद का संरक्षित मूल्य 120 रुपये प्रति किलोग्राम निर्धारित किया गया है। पानीपत के उपायुक्त विरेंदर कुमार दहिया ने योजना की जानकारी देते हुए बताया कि यह योजना मधुमक्खी पालकों के लिए आय की गारंटी सुनिश्चित करेगी और बाजार में मूल्य गिरावट की स्थिति में उन्हें आर्थिक नुकसान से बचाएगी।
डॉ. दहिया ने कहा कि हरियाणा सरकार की यह पहल न केवल मधुमक्खी पालन को प्रोत्साहित करेगी, बल्कि ग्रामीण क्षेत्रों में स्वरोजगार के नए अवसर भी सृजित करेगी। डॉ. दहिया ने बताया कि योजना का लाभ लेने के लिए मधुमक्खी पालकों को मधु क्रांति पोर्टल तथा भावान्तर भरपाई योजना पोर्टल (शहद) पर पंजीकरण कराना अनिवार्य है।
इसके साथ ही मधुमक्खी पालकों का सत्यापन किया जाना आवश्यक है। सत्यापन की अवधि एक जनवरी से 30 जून, 2026 तक निर्धारित की गई है।
डॉ. दहिया ने बताया कि प्रत्येक मधुमक्खी बक्से पर परिवार पहचान-पत्र के अंतिम चार अंक तथा बक्सा नंबर गोदना अनिवार्य होगा, ताकि पारदर्शिता बनी रहे। सत्यापन की प्रक्रिया जिला स्तर के अधिकारियों द्वारा पूरी की जाएगी। उन्होंने कहा कि मधुमक्खी पालन न केवल कृषि के साथ जुड़ा एक पूरक व्यवसाय है, बल्कि यह पर्यावरण संतुलन और फसल उत्पादन में भी अहम भूमिका निभाता है।
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हिन्दुस्थान समाचार / अनिल वर्मा