खिलाड़ियों की नियुक्ति पर हाईकोर्ट का फैसला सरकार के लिए करारा झटका : हुड्डा

 

चंडीगढ़, 04 सितंबर (हि.स.)। हरियाणा के पूर्व मुख्यमंत्री एवं नेता प्रतिपक्ष भूपेंद्र सिंह हुड्डा ने प्रदेश के उन पदकवीर खिलाडिय़ों को हार्दिक बधाई दी है, जिन्हें एचसीएस और एचपीएस के पदों पर नियुक्ति मिली है। उन्होंने कहा कि इन खिलाडिय़ों को अपना हक पाने के लिए आठ वर्ष तक अदालत में संघर्ष करना पड़ा। भाजपा सरकार ने उन्हें उनके पद, सम्मान और हक से वंचित रखने के लिए हर संभव प्रयास किया, लेकिन अंतत: पंजाब एवं हरियाणा हाईकोर्ट के फैसले ने इन खिलाडिय़ों को एचसीएस और एचपीएस में नियुक्त कर भाजपा सरकार को कड़ी फटकार लगाई है। इतना ही नहीं न्यायालय ने सरकार पर 50,000 रुपये का जुर्माना भी लगाया है।

भूपेंद्र सिंह हुड्डा ने शुक्रवार को चंडीगढ़ में जारी बयान में कहा कि इस मामले ने एक बार फिर भाजपा की खेल और खिलाड़ी विरोधी मानसिकता को उजागर कर दिया है। केवल खिलाड़ी ही नहीं, यह सरकार हरियाणा के कर्मचारियों, कच्चे कर्मचारियों और नौकरी के लिए संघर्ष कर रहे बेरोजगार युवाओं से भी नफरत करती है। यही कारण है कि हाईकोर्ट से लेकर सुप्रीम कोर्ट तक कांग्रेस सरकार द्वारा बनाई गई नियमितीकरण की नीति के पक्ष में फैसले आने के बावजूद भाजपा सरकार आंदोलनरत सफाई कर्मचारियों और गेस्ट टीचर्स को पक्का करने को तैयार नहीं है। यह सरकार कौशल निगम कर्मियों से किए गए अपने वादे को भी पूरा करने को राजी नहीं है। बहरहाल बीजेपी सरकार शायद ही एचपीएससी और एचएसएससी की कोई भर्ती ही बगैर कोर्ट के कड़े फैसले के बिना कर पाई हो।

हुड्डा ने कहा कि कांग्रेस सरकार के दौरान प्रदेश में खेल और खिलाडिय़ों को बढ़ावा देने के लिए ‘पदक लाओ, पद पाओ’ नीति बनाई गई थी। इसके तहत पदक विजेता खिलाडिय़ों को क्लास-1, क्लास-2 और सीधे डीएसपी जैसे पदों पर नियुक्ति का प्रावधान किया गया था। इस नीति का हरियाणा में जबरदस्त असर दिखा और हमारे खिलाडिय़ों ने विश्व पटल पर देश का परचम लहराया। लगभग हर खेल में हरियाणा के खिलाडिय़ों ने अन्य राज्यों से बेहतर प्रदर्शन किया। लेकिन भाजपा इसे बर्दाश्त नहीं कर सकी और उसने खिलाडिय़ों को डीएसपी जैसे उच्च पदों पर नियुक्ति देने के नियमों में बदलाव कर दिया। यही वजह है कि आज पदक विजेता खिलाडिय़ों को नियुक्ति पाने के लिए अदालत का दरवाजा खटखटाना पड़ता है।

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हिन्दुस्थान समाचार / संजीव शर्मा