हीमोफिलिया मरीजों के इलाज को मिलेगा सीएसआर फंड का सहारा, हर साल 50 करोड़ का खर्च
उद्योगों और कॉरपोरेट घरानों की मदद से 23 सिविल अस्पतालों की बदलेगी तस्वीर
चंडीगढ़, 25 अगस्त (हि.स.)। हीमोफिलिया मरीजों के इलाज में अब सीएसआर सराहा बनेगा। हर साल 50 करोड़ रुपये का खर्च नायब सरकार सीएसआर फंड से जुटाएगी।
सरकार की ओर से प्रदेश की स्वास्थ्य व्यवस्था को मजबूत करने के लिए कॉरपोरेट सोशल रिस्पॉन्सिबिलिटी फंड के तहत उद्योगों और कॉरपोरेट घरानों की मदद से सहयोग जुटाने की पहल शुरू की है। उद्योगों, कॉरपोरेट घरानों और व्यापारिक संगठनों को साथ जोड़कर 23 जिला सिविल अस्पतालों में आवश्यक बायोमेडिकल उपकरण उपलब्ध कराने और हीमोफिलिया मरीजों के उपचार को बेहतर बनाने पर विशेष जोर दिया जाएगा।
स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण विभाग की अतिरिक्त मुख्य सचिव डॉ. सुमिता मिश्रा ने मंगलवार को सभी उपायुक्तों को अपने-अपने जिलों में संभावित सीएसआर भागीदारों को सक्रिय रूप से जोड़ने के निर्देश दिए हैं। जिला स्तर पर किए गए आकलन के आधार पर 23 सिविल अस्पतालों में आवश्यक बायोमेडिकल उपकरणों की पहचान की जा चुकी है। सीएसआर सहयोग से इन अस्पतालों की जांच और उपचार क्षमता बढ़ने के साथ मरीजों को बेहतर सेवाएं मिल सकेंगी। इससे गंभीर मामलों को बड़े टर्शियरी सेंटरों में रेफर करने की जरूरत भी कम होगी और जिला स्तर पर स्वास्थ्य सेवाएं मजबूत होंगी।
हीमोफिलिया मरीजों पर विशेष फोकस
सरकार की इस पहल में हीमोफिलिया मरीजों के इलाज को भी प्रमुखता दी गई है। हरियाणा में करीब 1,000 पंजीकृत हीमोफिलिया मरीज हैं और उनके उपचार पर सालाना लगभग 50 करोड़ रुपये तक खर्च होता है। प्रति मरीज औसतन 4 से 5 लाख रुपये का उपचार खर्च आता है। उन्होंने कहा कि इन मरीजों को लगातार और समय पर उपचार उपलब्ध कराना बेहद जरूरी है, क्योंकि उपचार में रुकावट से विकलांगता, जटिलताओं और उत्पादकता के नुकसान का खतरा बढ़ सकता है। सीएसआर के माध्यम से कॉरपोरेट संस्थाएं सरकार द्वारा चिन्हित बायोमेडिकल उपकरणों को प्रायोजित करने अथवा हीमोफिलिया मरीजों के उपचार के लिए आर्थिक सहायता देने का विकल्प चुन सकेंगी।
पारदर्शी खरीद के लिए एचएमएससी को मिल सकेगा सीएसआर फंड
बायोमेडिकल उपकरणों की संस्थागत खरीद प्रक्रिया को पारदर्शी और प्रभावी बनाए रखने के लिए सीएसआर फंड सीधे हरियाणा मेडिकल सर्विसेज कॉरपोरेशन लिमिटेड को जारी किया जा सकेगा। यह राज्य की अधिकृत खरीद एजेंसी है, जो चिकित्सा उपकरणों, दवाओं और संबंधित स्वास्थ्य सेवाओं की खरीद करती है। इससे गुणवत्ता मानकों का पालन सुनिश्चित करने के साथ उपकरणों की जिला अस्पतालों तक तेजी से आपूर्ति में मदद मिलेगी।
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हिन्दुस्थान समाचार / संजीव शर्मा