हिसार : पूरे सैनिक सम्मान के साथ दी गई हवलदार दीपक गोयत को अंतिम विदाई

 


ब्लड कैंसर से पीड़ित दीपक का चल रहा था इलाज

हिसार, 13 जनवरी (हि.स.)। हांसी जिले के नारनौंद

क्षेत्र के गांव कापड़ो निवासी 29 वर्षीय हवलदार दीपक गोयत को मंगलवार को पूरे सैनिक

सम्मान के साथ अंतिम विदाई दी गई। ब्लड कैंसर से पीड़ित सैनिक दीपक ने सोमवार को दिल्ली

स्थित आर्मी हॉस्पिटल रिसर्च एंड रिफेरल (आरआर) अस्पताल में अंतिम सांस ली। वे 21 ग्रेनेडियर

बटालियन में तैनात थे।

सेना के वाहन से जब शहीद का पार्थिव शरीर उनके

पैतृक गांव कापड़ो पहुंचा तो पूरा इलाका ‘भारत माता की जय’ और ‘दीपक गोयत अमर रहें’ के नारों से गूंज उठा। गांव के प्रवेश द्वार

से लेकर शहीद के घर तक सैकड़ों वाहनों का काफिला उमड़ पड़ा। हर आंख नम थी। जैसे ही

पार्थिव शरीर घर पहुंचा, माहौल गमगीन हो गया। मां, पिता और पत्नी का रो-रोकर बुरा हाल

था। शहीद के अंतिम दर्शन के लिए ग्रामीणों और रिश्तेदारों की भारी भीड़ उमड़ पड़ी।

दीपक अपने माता-पिता के इकलौते बेटे थे। उनके पिता बलवान सिंह भी भारतीय सेना से सेवानिवृत्त

हैं। परिवार में उनकी पत्नी और तीन साल की दो नन्हीं जुड़वा बेटियां हैं, जिनके सिर

से पिता का साया उठ गया।

दीपक गोयत वर्ष 2016 में स्पोर्ट्स कोटा के तहत

कुश्ती खेल के माध्यम से भारतीय सेना में भर्ती हुए थे। खेल के प्रति उनका जुनून और

अनुशासन ही उन्हें सेना तक ले गया। उनकी ड्यूटी जम्मू-कश्मीर के गूगलपुर, कुपवाड़ा

क्षेत्र में रही, जहां उन्होंने देश की सीमाओं की रक्षा करते हुए कर्तव्य निभाया। शहीद

की अंतिम यात्रा पूरे सैन्य सम्मान के साथ निकाली गई। तिरंगे में लिपटा पार्थिव शरीर

जब श्मशान घाट की ओर बढ़ा, तो लोगों ने फूल बरसाकर श्रद्धांजलि दी। सेना के जवानों

ने गार्ड ऑफ ऑनर देकर अंतिम सलामी दी।

हिन्दुस्थान समाचार / राजेश्वर