हिसार: गेहूं के दुश्मन गुल्ली-डंडा पर एचएयू करेगा बड़ा शोध, नए शाकनाशी रसायन खोजे जाएंगे
शाकनाशी प्रतिरोधी खरपतवार के नियंत्रण के लिए 27.19 लाख की परियोजना मंजूर
डॉ. जयंत सिंधु के नेतृत्व में होगा शोध
हिसार, 22 सितंबर (हि.स.)। गेहूं की फसल के लिए लगातार चुनौती बन रहे शाकनाशी-प्रतिरोधी
गुल्ली-डंडा खरपतवार के नियंत्रण के लिए यहां के हरियाणा कृषि विश्वविद्यालय के वैज्ञानिक
नए रसायनों की खोज करेंगे। शोध का मुख्य उद्देश्य ऐसे प्रभावी शाकनाशियों का विकास
करना है, जो उन गुल्ली-डंडा खरपतवारों पर भी असरदार साबित हों, जिन पर पहले इस्तेमाल
किए जाने वाले रसायनों का प्रभाव कम हो गया है। इसके लिए हरियाणा राज्य उच्चतर शिक्षा
परिषद एवं हरियाणा राज्य अनुसंधान कोष ने दो वर्षीय शोध परियोजना को मंजूरी देते हुए
27.19 लाख रुपये की धनराशि स्वीकृत की है।
परियोजना के तहत शाकनाशी-प्रतिरोधी गुल्ली-डंडा के विरुद्ध नए रसायनों के डिजाइन,
विकास, उनकी संरचना और उपयोग का अध्ययन किया जाएगा। गुल्ली-डंडा, जिसे लिटिल सीड कैनरी
ग्रास के नाम से भी जाना जाता है, गेहूं की फसल में पाया जाने वाला प्रमुख खरपतवार
है। कई क्षेत्रों में इसके शाकनाशियों के प्रति प्रतिरोधी होने के कारण किसानों के
सामने इसके प्रभावी नियंत्रण की समस्या बढ़ती जा रही है।
शोध सफल होने पर किसानों को प्रतिरोधी खरपतवारों के बेहतर प्रबंधन में मदद
मिल सकती है। इससे गेहूं की फसल में खरपतवार से होने वाले नुकसान को कम करने, उत्पादकता
बढ़ाने और खेती की लागत नियंत्रित करने में सहायता मिलने की उम्मीद है। मौजूदा शाकनाशियों पर निर्भरता घटाने की दिशा में भी यह शोध महत्वपूर्ण
साबित हो सकता है। परियोजना का नेतृत्व हकृवि के रसायन विज्ञान विभाग के सहायक प्रोफेसर डॉ. जयंत
सिंधु करेंगे। डॉ. अनिल दुहन और डॉ. वीरेंद्र सिंह हुड्डा सह-अन्वेषक के रूप में शोध
में योगदान देंगे। कुलपति प्रो. बीआर कम्बोज ने मंगलवार कओ कहा कि कृषि क्षेत्र की नई चुनौतियों
के वैज्ञानिक एवं व्यावहारिक समाधान विकसित करने के लिए इस तरह के शोध कार्यों को प्राथमिकता
दी जा रही है। इस अवसर पर ओएसडी डॉ. अतुल ढींगड़ा, मौलिक विज्ञान एवं मानविकी महाविद्यालय
के अधिष्ठाता डॉ. राजेश गेरा, रसायन विज्ञान विभागाध्यक्ष डॉ. रजनीकांत शर्मा और मीडिया
एडवाइजर डॉ. संदीप आर्य उपस्थित रहे।
हिन्दुस्थान समाचार / राजेश्वर