हिसार : अब मध्य प्रदेश के खेतों में लहलहाएगी हरियाणा की मूंग
‘एमएच 1762’ पैदावार
बढ़ाने के लिए केडीएम सीड्स के साथ हुआ करार
हिसार, 21 जुलाई (हि.स.)। हरियाणा कृषि विश्वविद्यालय द्वारा विकसित मूंग की
उन्नत एवं बंपर पैदावार देने वाली किस्मों की मांग अब दूसरे राज्यों में भी तेजी से
बढ़ रही है। इसी कड़ी में विश्वविद्यालय ने तकनीकी व्यवसायीकरण को बढ़ावा देते हुए
मध्य प्रदेश के खेतों तक अपनी पहुंच बनाने के लिए एक बड़ा कदम उठाया है।
कुलपति प्रो. बीआर कम्बोज के नेतृत्व में विश्वविद्यालय ने मूंग की आधुनिक
किस्म ‘एमएच 1762’ का प्रामाणिक बीज किसानों तक पहुंचाने के लिए केडीएम सीड्स एंड इंफ्रास्ट्रक्चर
प्राइवेट लिमिटेड, खांडवा (मध्य प्रदेश) के साथ समझौता ज्ञापन (एमओयू) पर हस्ताक्षर
किए हैं। करार की जानकारी देते हुए कुलपति प्रो. बीआर कम्बोज ने मंगलवार काे बताया कि विश्वविद्यालय
का मुख्य ध्येय अपने उच्चस्तरीय शोध का सीधा लाभ देश के अन्नदाताओं तक पहुँचाना है।
इस समझौते के तहत मध्य प्रदेश की यह कंपनी ‘एमएच 1762’ किस्म के उच्च गुणवत्ता वाले
बीज तैयार कर किसानों को उपलब्ध कराएगी, जिससे उनकी फसल सुरक्षित रहेगी और पैदावार
में भारी इजाफा होगा।
मानव संसाधन प्रबंधन निदेशक डॉ. रमेश यादव ने बताया कि एमओयू पर विश्वविद्यालय
की ओर से अनुसंधान निदेशक डॉ. राजबीर गर्ग तथा कंपनी की तरफ से चेयरमैन सुभाष महता
ने हस्ताक्षर किए हैं, जिसके बदले कंपनी विश्वविद्यालय को लाइसेंस फीस अदा करेगी। किस्म
की बेमिसाल विशेषताओं पर प्रकाश डालते हुए अनुसंधान निदेशक डॉ. राजबीर गर्ग ने बताया
कि ‘एमएच 1762’ पीला मोज़ेक वायरस और अन्य प्रमुख रोगों के प्रति पूरी तरह रोधक है।
यह किस्म बसंत एवं ग्रीष्म काल में बिजाई के लिए अनुमोदित की गई है, जो मात्र 60 दिनों
में पककर तैयार हो जाती है। इसके दाने मध्यम आकार के चमकीले हरे होते हैं और यह प्रचलित
किस्मों की तुलना में 10 से 15 प्रतिशत तक अधिक पैदावार देने में सक्षम है।
इस अवसर पर ओएसडी डॉ. अतुल ढींगड़ा, कृषि महाविद्यालय के अधिष्ठाता डॉ. रमेश
गोयल, डॉ. एसके पाहुजा, डॉ. नीरज कुमार, डॉ. वीरेन्द्र मोर, डॉ. योगेश जिंदल तथा डॉ.
पवन सहित कई गणमान्य अधिकारी उपस्थित रहे।
हिन्दुस्थान समाचार / राजेश्वर