हरियाणा में नलकूपों के पानी की होगी मुफ्त वैज्ञानिक जांच

 


चंडीगढ़, 03 जुलाई (हि.स.)। हरियाणा के मुख्यमंत्री नायब सिंह सैनी ने कृषि विभाग के अधिकारियों को निर्देश दिए कि प्रदेश में किसानों के नलकूपों/ट्यूबवेलों के पानी की गुणवत्ता की वैज्ञानिक जांच की प्रक्रिया तुरंत शुरू की जाए, ताकि किसानों को उनके खेत और पानी की गुणवत्ता के अनुरूप समय पर वैज्ञानिक सलाह उपलब्ध कराई जा सके। उन्होंने कहा कि राज्य सरकार प्रदेश के सभी नलकूपों के पानी की गुणवत्ता की जांच करवाएगी और इस पूरी प्रक्रिया को किसान हित में सरल, पारदर्शी और प्रभावी बनाया जाएगा।

मुख्यमंत्री शुक्रवार को चंडीगढ़ में राज्य सरकार की बजट घोषणाओं, मुख्यमंत्री घोषणाओं तथा संकल्प पत्र की समीक्षा के लिए बैठक कर रहे थे। मुख्यमंत्री ने बैठक में निर्देश दिए कि किसानों के नलकूपों के पानी के नमूनों की मुफ्त जांच सुनिश्चित की जाए तथा किसानों को निर्धारित प्रक्रिया के अनुसार अपने पानी के नमूने परीक्षण हेतु संबंधित प्रयोगशालाओं में जमा कराने की सुविधा उपलब्ध कराई जाए। नलकूपों के पानी की जांच में कार्बोनेट, बाइकार्बोनेट, कैल्शियम, मैग्नीशियम, सोडियम, क्लोराइड सहित अन्य आवश्यक रासायनिक तत्वों और जल गुणवत्ता मानकों का परीक्षण किया जाए।

उन्होंने अधिकारियों को निर्देश दिए कि इन परीक्षणों के आधार पर किसानों को स्पष्ट रूप से बताया जाए कि उनके पानी की गुणवत्ता के अनुसार कौन-सी फसलें उपयुक्त रहेंगी, किन फसलों से बचना चाहिए और किस प्रकार की पोषक तत्व संबंधी कमी या जल-गुणवत्ता की स्थिति में कौन-सी कृषि पद्धति अपनाई जानी चाहिए।

मुख्यमंत्री ने कहा कि सरकार का उद्देश्य केवल पानी की जांच कर रिपोर्ट देना नहीं, बल्कि पानी की रिपोर्ट के आधार पर फसल चयन की वैज्ञानिक व्यवस्था विकसित करना है, ताकि किसान उपलब्ध जल की गुणवत्ता के अनुरूप सही फसल का चयन कर सकें।

मुख्यमंत्री ने कहा कि एपीडा से प्रमाणित अथवा प्राकृतिक/जैविक खेती अपनाने वाले किसानों को 10,000 रुपये प्रति एकड़ प्रति वर्ष की दर से प्रोत्साहन राशि उपलब्ध कराने के संबंध में आवश्यक प्रक्रिया को सुव्यवस्थित किया जाए, ताकि पात्र किसानों को निर्धारित प्रावधानों के अनुसार इसका लाभ मिल सके। उन्होंने कहा कि प्राकृतिक खेती अपनाने वाले किसानों को देसी गाय खरीदने के लिए 30,000 रुपये तक की वित्तीय सहायता उपलब्ध कराने संबंधी व्यवस्थाओं को प्रभावी रूप से आगे बढ़ाया जाए, ताकि किसान गो-आधारित प्राकृतिक खेती के लिए जरूरी संसाधन जुटा सकें।

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हिन्दुस्थान समाचार / संजीव शर्मा