बैंक घोटाले से सबक लेकर सरकार लाएगी ‘हरियाणा लोकल ऑडिट बिल, 2026’
तय होगी अधिकारियों की जिम्मेदारी
चंडीगढ़, 29 अगस्त (हि.स.)। हाल ही में हुए करीब 661 करोड़ के आईडीएफसी फर्स्ट बैंक व एयू स्मॉल फाइनेंस बैंक घोटाले से सबक लेते हुए सरकार ‘हरियाणा लोकल ऑडिट बिल, 2026’ ला रही है। इसका मकसद स्थानीय निकायों और सरकारी फंड से चलने वाले संस्थानों के ऑडिट के लिए एक कानूनी फ्रेमवर्क बनाना और लोकल ऑडिट विभाग के निदेशक को गैर-कानूनी पेमेंट और लापरवाही या गलत काम से हुए नुकसान के लिए अधिकारियों पर सरचार्ज लगाने का अधिकार देना है।
आईडीएफसी फर्स्ट बैंक व एयू स्मॉल फाइनेंस बैंक तथा कोटक महिंद्रा बैंक घोटाले में कथित तौर पर पंचकूला नगर निगम, कालका म्युनिसिपल काउंसिल और दूसरे डिपार्टमेंट्स से बड़ी रकम निकाल ली गई थी। कोटक महिंद्रा बैंक घोटाला जो 2020 से 2026 तक चला, उसमें भी पंचकूला म्युनिसिपल कॉर्पोरेशन से करोड़ों रुपये निकालने का आरोप था। बाद में पता चला कि बैंक रिकॉर्ड ऑडिटर्स को जमा नहीं किए गए थे।
वित्त विभाग के एक अधिकारी के अनुसार, राज्य सरकार को लगा कि अधिकारियों को रिकॉर्ड पेश करने के लिए मजबूर करने के लिए मजबूत कानूनी शक्तियों की ज़रूरत है। यह बिल, जो चल रहे मानसून सेशन में पेश किया जाएगा, राज्य विधानसभा को सालाना ऑडिट रिपोर्ट जमा करने की टाइमलाइन भी तय करता है और लोकल अथॉरिटीज़ को एक तय समय के अंदर ऑडिट पैरा का जवाब देना होगा।
एक ऑडिटर लिखकर वाउचर, स्टेटमेंट, रिटर्न, कॉरेस्पोंडेंस, नोट्स और इलेक्ट्रॉनिक रिकॉर्ड सहित दूसरे डॉक्यूमेंट पेश करने की मांग कर सकता है। अधिकारियों को पेश होने और एक्सप्लेनेशन देने के लिए भी कहा जा सकता है। जो अधिकारी जानबूझकर ऑडिटर की रिक्विजिशन को मानने में लापरवाही करता है या मना करता है, उस पर 1,000 रुपये से 5,000 रुपये तक का फाइन लग सकता है। ऑडिट छह महीने के अंदर पूरा होना चाहिए। ऑडिट रिपोर्ट में गैर-कानूनी पेमेंट, लापरवाही या गलत काम से हुए नुकसान, फंड का गलत इस्तेमाल या गलत इस्तेमाल और अकाउंटिंग सिस्टम को बेहतर बनाने के लिए सुधार के उपायों को बताया जाएगा।
एग्जीक्यूटिव अथॉरिटी के पास गड़बडिय़ों को ठीक करने और ऑडिट रिपोर्ट और की गई कार्रवाई को अपनी गवर्निंग बॉडी के सामने रखने के लिए दो महीने का समय होगा। गवर्निंग बॉडी की मीटिंग के एक महीने के अंदर डायरेक्टर को बदली हुई रिपोर्ट भेजनी होगी। डायरेक्टर यह तय कर सकता है कि कोई गलत रकम चार्ज की जानी चाहिए या नहीं और किसके खिलाफ। ऐसे मामलों में जहां क्रिमिनल गलत इस्तेमाल या धोखाधड़ी का शक हो, मामले की रिपोर्ट सरकार को दी जा सकती है।
नया बिल डायरेक्टर को गैर-कानूनी पेमेंट और नुकसान की भरपाई जिम्मेदार लोगों से करने का अधिकार देता है। वसूल की जाने वाली रकम एक महीने के अंदर देनी होगी, ऐसा न करने पर उसे लैंड रेवेन्यू के बकाए के तौर पर वसूला जा सकता है। कोई पीडि़त व्यक्ति एक महीने के अंदर प्रशासनिक सचिव के सामने सरचार्ज के खिलाफ अपील कर सकता है।
बिल में यह भी प्रावधान है कि अगर किसी लोकल अथॉरिटी में गलत इस्तेमाल, चोरी या प्राकृतिक आपदाओं के कारण पैसे या सामान का नुकसान होता है, तो तुरंत स्पेशल ऑडिट किए जाएंगे। डायरेक्टर एग्जीक्यूटिव अधिकारियों के अकाउंट्स और ट्रांज़ैक्शन पर एक कंसोलिडेटेड रिपोर्ट राज्य सरकार को देंगे, जिसे राज्य विधानसभा के सामने रखा जाएगा।
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हिन्दुस्थान समाचार / संजीव शर्मा