मिड-डे मील बनाने वालों से नहीं लिया जाएगा दूसरा काम

 

शिक्षा निदेशालय ने जिला अधिकारियों को जारी किए निर्देश

चंडीगढ़, 12 जनवरी (हि.स.)। हरियाणा शिक्षा विभाग ने प्रदेश के सभी जिला प्राथमिक शिक्षा अधिकारियों को निर्देश दिए हैं कि मिड-डे मील के अंतर्गत कार्यरत 28 हजार रसोइया सह-सहायकों को भोजन तैयार करने के अलावा किसी अन्य कार्य में न लगाया जाए।

जिला मौलिक शिक्षा अधिकारियों को यह भी निर्देश दिया गया है कि वह रसोइया सह-सहायकों की साल में 2 बार चिकित्सा जांच सुनिश्चित करें। यदि विद्यालय में छात्रों की कम संख्या के कारण किसी रसोइया सह-सहायक को हटाया जाता है और उसी गांव के किसी अन्य स्कूल में कोई पद रिक्त होता है, तो उन्हें उस पद पर समायोजित किया जा सकता है।

हरियाणा में मिड डे मील वर्कर पिछले कई महीनों से प्रदर्शन कर रहे हैं। आरोप है कि स्कूलों में कई अन्य काम करने के लिए मजबूर किया जाता है, जिनमें सफाई, खेल के मैदानों में घास काटना और यहां तक कि छतों की सफाई भी शामिल है।

मिड-डे मील वर्कर्स यूनियन की प्रमुख ललिता खन्ना ने कहा कि फिलहाल मध्याह्न भोजन बनाने वाले रसोइयों को केवल 10 महीने का मानदेय मिलता है। शिक्षा विभाग से मांग है कि अन्य कर्मचारियों की तरह 12 महीने का मानदेय दिया जाए। मिड-डे मील वर्कर्स यूनियन के महासचिव जय भगवान ने बताया विभाग ने कुछ दिशा निर्देश जारी किए हैं, लेकिन इनसे श्रमिकों को कोई मदद नहीं मिलने वाली है। हम अपनी जायज मांगों को पूरा करवाने के लिए संघर्ष कर रहे हैं। मिड-डे मील कर्मचारियों को प्रति माह 7 हजार रुपए मिलते हैं, जो समय पर नहीं दिए जाते हैं।

---------------

हिन्दुस्थान समाचार / संजीव शर्मा