हरियाणा में सरकार संग वार्ता विफल, तीन दिन की हड़ताल पर जाएंगे बिजली कर्मचारी
चंडीगढ़, 09 अगस्त (हि.स.)। हरियाणा में बिजली कर्मचारियों और निगम प्रबंधन के बीच रविवार को हुई वार्ता विफल होने के बाद बिजली कर्मचारी तीन दिवसीय हड़ताल पर चले गए हैं। पैरेलल लाइसेंस, एग्री डिस्कॉम और स्मार्ट मीटरिंग समेत विभिन्न मांगों को लेकर हरियाणा बिजली कर्मचारी एवं इंजीनियर्स संयुक्त संघर्ष मोर्चा और बिजली निगम प्रबंधन के बीच शक्ति भवन में बैठक हुई, लेकिन किसी मुद्दे पर सहमति नहीं बन सकी।
ऊर्जा विभाग की अतिरिक्त मुख्य सचिव आशिमा बराड़ की अध्यक्षता में हुई बैठक के बाद कर्मचारी नेताओं ने 10 अगस्त की रात 10 बजे से तीन दिन की हड़ताल पर जाने का ऐलान किया। कर्मचारी नेताओं का कहना है कि सरकार और प्रबंधन की ओर से उनकी प्रमुख मांगों पर कोई ठोस आश्वासन नहीं दिया गया।
कर्मचारी नेताओं ने आरोप लगाया कि बैठक में प्रबंधन ने स्पष्ट कर दिया कि पैरेलल लाइसेंस, एग्री डिस्कॉम और स्मार्ट मीटरिंग के मुद्दे पर सरकार कोई आश्वासन देने की स्थिति में नहीं है। वहीं ठेका कर्मचारियों को नियमित करने, समान काम के लिए समान वेतन, जोखिम भत्ता और एक्स-ग्रेशिया रोजगार योजना में लगाई गई शर्तों को हटाने समेत अन्य मांगों पर भी कोई ठोस निर्णय नहीं लिया गया।
प्रबंधन ने इन मुद्दों को सरकार के स्तर का विषय बताया। कर्मचारी नेताओं का आरोप है कि प्रबंधन बिजली मंत्री के साथ पहले हुई बैठक में दिए गए आश्वासनों से भी पीछे हटता नजर आया।
वरिष्ठ सदस्य देवेंद्र सिंह हुड्डा, इकबाल चंदाना, सुरेश राठी, विजेंद्र बराड़, पुनीत कुंडू, राजेंद्र सिरोही, राजेंद्र राणा, रविंद्र घणघस, यशपाल देशवाल, सुरेंद्र यादव, विनोद कुमार, अशोक कुमार, विकास नेहरा, राजकुमार महला, बलजीत बेनीवाल और अनिल पहल ने कहा कि सरकार के रवैये ने कर्मचारियों को हड़ताल का फैसला लेने के लिए मजबूर किया है।
बिजली कर्मचारियों और इंजीनियरों की राष्ट्रीय समन्वय समिति (एनसीसीओईईई) के वरिष्ठ सदस्य और इलेक्ट्रिसिटी एम्प्लॉइज फेडरेशन ऑफ इंडिया (ईईएफआई) के राष्ट्रीय उपाध्यक्ष सुभाष लांबा ने सरकार और बिजली निगम प्रबंधन के रुख की निंदा की। उन्होंने कहा कि हरियाणा के बिजली कर्मचारियों और इंजीनियरों की हड़ताल के समर्थन में 11 अगस्त को देशभर में एकजुटता प्रदर्शन किए जाएंगे।
लांबा ने चेतावनी दी कि यदि कर्मचारियों के खिलाफ किसी तरह की दमनात्मक कार्रवाई की गई तो उसका देशभर में विरोध किया जाएगा।
बिजली कर्मचारियों की हड़ताल को किसान संगठनों और ग्राम पंचायतों का भी समर्थन मिल रहा है। संयुक्त किसान मोर्चा के विभिन्न घटकों ने प्रदर्शनों में शामिल होकर कृषि क्षेत्र के लिए अलग एग्री डिस्कॉम बनाने का विरोध किया है।
किसान संगठनों का तर्क है कि एग्री डिस्कॉम बनने से क्रॉस-सब्सिडी की व्यवस्था खत्म हो सकती है और बिजली दरों में बढ़ोतरी का रास्ता खुल सकता है। किसानों ने एग्री डिस्कॉम की करीब 5,427 करोड़ रुपये की देनदारियों को लेकर भी सवाल उठाए हैं।
सोनीपत, रोहतक और झज्जर समेत कई जिलों की निर्वाचित ग्राम पंचायतों ने बिजली क्षेत्र में निजीकरण से जुड़े कदमों का विरोध करते हुए कर्मचारियों की हड़ताल का समर्थन किया है। किसान संगठनों ने महापंचायतों के माध्यम से एग्री डिस्कॉम, स्मार्ट मीटरिंग और पैरेलल लाइसेंस के खिलाफ आंदोलन को और तेज करने का ऐलान किया है।
बिजली कर्मचारियों की तीन दिवसीय हड़ताल के चलते प्रदेश में बिजली आपूर्ति और संबंधित सेवाओं पर असर पड़ने की आशंका है। हालांकि, आवश्यक सेवाओं को सुचारु रखने के लिए सरकार और निगम प्रबंधन की ओर से क्या वैकल्पिक व्यवस्था की जाएगी, इस पर स्थिति स्पष्ट होना बाकी है।
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हिन्दुस्थान समाचार / संजीव शर्मा