हरियाणा की बौद्ध विरासत को वैश्विक पहचान दिलाने की पहल तेज

 

श्रीलंका के 200 बौद्ध भिक्षुओं ने सामूहिक हस्ताक्षर कर मुख्यमंत्री को भेजा पत्र

चंडीगढ़, 15 अप्रैल (हि.स.)। हरियाणा में बौद्ध पर्यटन को वैश्विक पहचान दिलाने की दिशा में एक महत्वपूर्ण पहल सामने आई है। श्रीलंका के वरिष्ठ बौद्ध विद्वान एवं वड्दुआ स्थित वसंथाराम मंदिर के मुख्य अधिष्ठाता प्रो. एम विजिथाधम्मा थेरो के नेतृत्व में सैकड़ों बौद्ध भिक्षुओं ने हरियाणा के मुख्यमंत्री नायब सिंह सैनी को पत्र लिखकर राज्य में अंतरराष्ट्रीय ‘बौद्ध तीर्थ सर्किट’ शुरू करने का अनुरोध किया है। पत्र में उल्लेख किया गया है कि एक मई को मनाई जाने वाली बुद्ध पूर्णिमा के अवसर पर इस पहल की शुरुआत की जा सकती है, जिससे हरियाणा के समृद्ध बौद्ध इतिहास और सांस्कृतिक विरासत को अंतरराष्ट्रीय स्तर पर पहचान मिल सकेगी।

बौद्ध भिक्षुओं ने मुख्यमंत्री को लिखे अपने पत्र में कहा कि हरियाणा भगवान बुद्ध के ‘चरिका मार्ग’ (यात्रा पथ) से जुड़ा रहा है और यहां कई महत्वपूर्ण बौद्ध उपदेशों का संबंध माना जाता है। इन्हीं यात्राओं के दौरान भगवान बुद्ध ने अपने कई महत्वपूर्ण उपदेश हरियाणा की भूमि पर दिए थे। यदि हरियाणा सरकार इस प्रस्ताव को लागू करती है तो न केवल धार्मिक पर्यटन को बढ़ावा मिलेगा, बल्कि अंतरराष्ट्रीय बौद्ध समुदाय के लिए हरियाणा एक प्रमुख तीर्थ स्थल के रूप में उभर सकता है।

पत्र के साथ श्रीलंका के विभिन्न बौद्ध मठों से जुड़े करीब 200 भिक्षुओं के हस्ताक्षर संलग्न किए गए हैं। हरियाणा में इस दिशा में लंबे समय से काम कर रहे यमुनानगर निवासी द मैत्रेय ट्रस्ट के संचालक सिद्धार्थ गौरी और डा. सत्यदीप नील गौरी ने बताया कि हर साल करीब आठ लाख विदेशी बौद्ध तीर्थयात्री दिल्ली आते हैं, जो हरियाणा में बौद्ध सर्किट शुरू होने पर यहां यात्रा करने जरूर आएंगे। विपश्यना ध्यान की मूल शिक्षाएं जिसे प्राचीन काल में ‘महासतिपट्टान सुत्त’ कहा जाता है, हरियाणा की धरती पर ही दी गई थी। यह उपदेश यमुनानगर के टोपराकलां में दिया गया था, जिसे प्राचीन समय में ‘कम्मसद्धम्म’ के नाम से जाना जाता था।

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हिन्दुस्थान समाचार / संजीव शर्मा