गुरुग्राम: तिरंगा भारत की आत्मा एवं स्वाभिमान का प्रतीक: शील मधुर

 


-22 जुलाई 1947 को संविधान सभा ने तिरंगे के मौजूदा स्वरूप को दी थी स्वीकृति

गुरुग्राम, 22 जुलाई (हि.स.)। सादर इंडिया मंच के राष्ट्रीय अध्यक्ष एवं हरियाणा के पूर्व पुलिस महानिदेशक (डीजीपी) शील मधुर ने कहा कि 22 जुलाई भारतीय इतिहास का अत्यंत गौरवशाली दिन है। इसी दिन वर्ष 1947 में संविधान सभा ने तिरंगे के मौजूदा स्वरूप को स्वतंत्र भारत के राष्ट्रीय ध्वज के रूप में स्वीकृति दी थी। वे बुधवार को सेक्टर-28 स्थित सादर इंडिया मुख्यालय में तिरंगा दिवस कार्यक्रम मनाते हुए लोगों को संबोधित कर रहे थे।

कार्यक्रम का शुभारंभ राष्ट्रध्वज को पुष्प अर्पित कर तथा तिरंगे को सलामी देकर किया गया। इसके उपरांत उपस्थित सभी लोगों ने राष्ट्रगान का सामूहिक गायन किया और राष्ट्र की एकता, अखंडता एवं संप्रभुता की रक्षा का संकल्प लिया। प्रतिवर्ष की भांति इस वर्ष भी 22 जुलाई को सादर इंडिया मंच के राष्ट्रीय अध्यक्ष एवं हरियाणा के पूर्व पुलिस महानिदेशक शील मधुर के नेतृत्व में सेक्टर-28 स्थित सादर इंडिया मुख्यालय में तिरंगा दिवस उत्साह, गर्व और देशभक्ति के वातावरण में मनाया गया। कार्यक्रम में बड़ी संख्या में राष्ट्रभक्तों, समाजसेवियों एवं प्रबुद्ध नागरिकों ने भाग लिया। उन्होंने कहा कि यह दिवस केवल एक ऐतिहासिक घटना का स्मरण नहीं, बल्कि उन असंख्य स्वतंत्रता सेनानियों के त्याग, बलिदान और तपस्या को नमन करने का अवसर भी है, जिन्होंने तिरंगे की आन-बान-शान के लिए अपना सर्वस्व न्योछावर कर दिया।

उन्होंने कहा कि तिरंगा केवल तीन रंगों का ध्वज नहीं, बल्कि भारत की आत्मा, स्वाभिमान, लोकतांत्रिक चेतना और राष्ट्रीय अस्मिता का जीवंत प्रतीक है। जब-जब यह ध्वज लहराता है, तब-तब प्रत्येक भारतीय के मन में राष्ट्रप्रेम, कर्तव्य और बलिदान की भावना जागृत होती है।

शील मधुर ने कहा कि आज आवश्यकता इस बात की है कि युवा पीढ़ी को तिरंगे के इतिहास, उसके आदर्शों और उसके सम्मान के प्रति जागरुक किया जाए। राष्ट्रध्वज का सम्मान केवल राष्ट्रीय पर्वों तक सीमित नहीं रहना चाहिए, बल्कि प्रत्येक नागरिक के व्यवहार, चरित्र और कर्तव्यनिष्ठा में भी परिलक्षित होना चाहिए। उन्होंने कहा कि जिस राष्ट्र के नागरिक अपने ध्वज का सम्मान करते हैं, वही राष्ट्र विश्व में सम्मान और नेतृत्व प्राप्त करता है।

उन्होंने सभी नागरिकों से आह्वान किया कि वे राष्ट्रहित को सर्वोपरि रखते हुए संविधान की मर्यादाओं का पालन करें तथा तिरंगे के सम्मान और उसके गौरव का संदेश घर-घर तक पहुंचाएं। यही तिरंगा दिवस मनाने का वास्तविक उद्देश्य है। कार्यक्रम के अंत में उपस्थित सभी लोगों ने सादर इंडिया के राष्ट्रीय अध्यक्ष पूर्व पुलिस महानिदेशक शील मधुर के नेतृत्व में सामूहिक रूप से यह संकल्प लिया कि 22 जुलाई का दिन तिरंगा दिवस एक राष्ट्रीय पर्व के रूप में घोषित करने की अपनी वर्षों पुरानी मांग को वह तब तक जारी रखेंगे जब तक सरकार उनकी यह मांग मान नहीं लेती।

हिन्दुस्थान समाचार / ईश्वर