भिवानी: शिक्षक शैलेश कुमार को सीएम नायब सिंह ने राज्य पुरस्कार से नवाजा

 


-शिक्षा के प्रति समर्पण, शैक्षणिक विकास समेत कई उपलब्धियों पर दिया गया सम्मान

-भिवानी के लेघां गांव में पीजीटी हैं शैलेश कुमार

भिवानी, 05 सितंबर (हि.स.)। राष्ट्रीय शिक्षक दिवस के अवसर पर शिक्षक शैलेश कुमार को मुख्यमंत्री नायब सिंह सैनी ने राज्य शिक्षक पुरस्कार से सम्मानित किया। एक राष्ट्र निर्माता के रूप में शैलेश कुमार ने विद्यालय में ना केवल किताबी, बल्कि उससे कहीं आगे बढक़र विद्यार्थियों को ज्ञान दिया। पीएम श्री राजकीय वरिष्ठ माध्यमिक विद्यालय लेघां के पीजीटी फिजिक्स शैलेश कुमार अपनी ड्यूटी को पूरी शिद्दत से करते हुए हर पल छात्रों के हित में काम करके कर्तव्य को पूर्ण करते हैं।

शैलेश कुमार ने 2006 में अतिथि भौतिक प्रवक्ता के रूप में हरियाणा के शिक्षा विभाग में सफर की शुरुआत की थी। अपने ज्ञान कौशल से उन्होंने बच्चों को तकनीकी ज्ञान से भी जोडऩे का काम किया। उनके काम के आधार पर ही शिक्षा विभाग हरियाणा की ओर से मूल्यांकन किया गया। इस मूल्यांकन में शिक्षक दिवस पर राज्य पुरस्कार के लिए चुने गए। शनिवार को मुख्यमंत्री नायब सिंह सैनी, शिक्षा मंत्री महीपाल ढांडा ने सम्मानित किया। उनकी ओर से शैक्षणिक क्षेत्र में बेहतर कार्यों की सराहना की। राज्य पुरस्कार मिलने पर शिक्षक शैलेश कुमार ने कहा कि उन्होंने अपना कर्म किया। बच्चों का भविष्य बनाने के लिए पहले से भी अधिक उत्साह से वे आगे काम करेंगें। उन्होंने कहा कि एक शिक्षक का बच्चों के प्रति कर्तव्य होता है। उसी कर्तव्य का निर्वहन उन्होंने किया है। शिक्षक होना सिर्फ एक नौकरी, रोजगार नहीं है बल्कि यह एक पवित्र जिम्मेदारी है।

उनका कर्तव्य बच्चों को ज्ञान देना ही नहीं, संस्कार देना भी है। बच्चे को केवल किताब पढ़ाना शिक्षक का काम नहीं है। हमारा काम है उसे अच्छा इंसान बनाना। अगर बच्चा गणित में तेज है, लेकिन उसमें बड़ों का आदर नहीं है, तो हमारी शिक्षा अधूरी है। हमें बच्चों में ईमानदारी, अनुशासन, दया और देशप्रेम के संस्कार बोने हैं। शैलेश कुमार ने कहा कि कक्षा में कोई बच्चा पढ़ाई में तेज होता है, कोई कमजोर। अमीर भी है, गरीब भी हैं, लेकिन एक सच्चे शिक्षक के लिए सभी बच्चे एक समान हैं। कमजोर बच्चे का हाथ पकडक़र उसे आगे बढ़ाना, उसे यह एहसास दिलाना कि तुम भी कर सकते हो। यही हमारी सबसे बड़ी सेवा है। बच्चे के अंदर के हुनर को पहचानना भी शिक्षक का कर्तव्य होता है। हर बच्चा अपने आप में खास है। कोई चित्रकला में अच्छा है, तो कोई खेल में, कोई संगीत में। शिक्षक का काम है उस छुपी हुई प्रतिभा को पहचानना और उसे तराशना। हमें बच्चों को रटना नहीं, सोचना सिखाना है। सवाल पूछना सिखाना है।

हिन्दुस्थान समाचार / ईश्वर