गुरुग्राम: नौ अक्टूबर से होगा श्री दुर्गा रामलीला का भव्य मंचन, हो रही रिहर्सल
-श्री दुर्गा रामलीला कमेटी ने गणेश चतुर्थी के साथ शुरू की रामलीला मंचन की तैयारियां
गुरुग्राम, 15 सितंबर (हि.स.)। भगवान गणेश के पूजन और धार्मिक विधि-विधान के साथ श्री दुर्गा रामलीला कमेटी ट्रस्ट ने अपनी 61वीं रामलीला के मंचन की तैयारियों का विधिवत शुभारंभ कर दिया। गणेश चतुर्थी के पावन अवसर पर भगवान गणेश की पूजा-अर्चना के बाद रामलीला के सभी स्वरूप कलाकारों का धागा बंधन संस्कार किया गया। धागा बंधन के साथ ही कलाकारों ने भगवान श्रीराम की लीला को श्रद्धा, निष्ठा और पूर्ण समर्पण के साथ निभाने का संकल्प लिया।
श्री दुर्गा रामलीला कमेटी इस वर्ष अपने 61वें वर्ष में प्रवेश कर रही है। इस ऐतिहासिक सफर की रामलीला मंचन को लेकर कमेटी के पदाधिकारियों, सदस्यों और कलाकारों में विशेष उत्साह है। आगामी नौ अक्टूबर से श्री दुर्गा रामलीला का भव्य मंचन शुरू होगा। इसके लिए कलाकारों की नियमित रिहर्सल शुरू हो चुकी है। मंचन को यादगार बनाने के लिए तैयारियां जोर-शोर से चल रही हैं। गणेश चतुर्थी के अवसर पर हुए धागा बंधन के बाद सभी स्वरूप कलाकार दशहरा पर्व तक रामलीला मंचन के लिए पूरी तरह समर्पित रहेंगे। कलाकारों की नियमित रिहर्सल के साथ-साथ संवाद, अभिनय, भाव-भंगिमा, आवाज, सुर-ताल और मंचीय प्रस्तुति की बारीकियों पर विशेष ध्यान दिया जा रहा है।
इस अवसर पर श्री दुर्गा रामलीला कमेटी के प्रधान कपिल सलूजा और सचिव अशोक प्रजापति ने बताया कि 61वें वर्ष के रामलीला मंचन को यादगार बनाने के लिए इस बार विशेष तैयारियां की जा रही हैं। रामलीला स्थल की साज-सज्जा, मंच, टेंट और लाइटिंग को भव्य रूप देने के साथ-साथ दर्शकों के बैठने की व्यवस्था पर भी विशेष ध्यान दिया जाएगा, ताकि रामलीला देखने आने वाले श्रद्धालुओं को बेहतर सुविधाएं मिल सकें।
कमेटी के प्रेस प्रवक्ता राजकुमार सैनी ने बताया कि रामलीला को भव्यता प्रदान करने के लिए कलाकार पूरी लगन और मेहनत से रिहर्सल में जुट गए हैं। उन्होंने कहा कि हर वर्ष की तरह इस बार भी नए कलाकारों को मंच पर अपनी प्रतिभा दिखाने का अवसर दिया जाएगा, जिससे नई प्रतिभाओं को प्रोत्साहन मिलने के साथ-साथ भविष्य के लिए भी कलाकार तैयार होते रहें।
इस अवसर पर श्री दुर्गा रामलीला कमेटी ट्रस्ट के सभी पदाधिकारी, कार्यकारिणी सदस्य, सदस्यगण एवं कलाकार उपस्थित रहे।
हिन्दुस्थान समाचार / ईश्वर