चंडीगढ़: नर्सिंग ऑफिसर्स वेलफेयर एसोसिएशन ने दिया बिजली कर्मचारियों को समर्थन
-बिजली निजीकरण के विरोध में उतरी नर्सिंग ऑफिसर्स वेलफेयर एसोसिएशन
-बिजली निजीकरण के फैसले को वापस लिया जाए: विनिता बांगड़
-कर्मचारियों की सेवा सुरक्षा, रोजगार को नजरअंदाज नहीं किया जा सकता
चंडीगढ़, 23 अक्टूबर (हि.स.)। हरियाणा में बिजली वितरण प्रणाली के निजीकरण के विरोध में चल रही बिजली कर्मचारियों की हड़ताल को अब नर्सिंग ऑफिसर्स वेलफेयर एसोसिएशन हरियाणा ने भी समर्थन दे दिया है। एसोसिएशन ने इस संबंध में मुख्यमंत्री, ऊर्जा मंत्री, मुख्य सचिव और अतिरिक्त मुख्य सचिव बिजली विभाग को पत्र लिखकर निजीकरण के फैसले को वापस लेने की मांग की है।
एसोसिएशन ने अपने पत्र में कहा है कि हरियाणा बिजली नियामक आयोग (एचईआरसी) द्वारा गुरुग्राम और नूंह जिलों में बिजली वितरण प्रणाली को निजी कंपनियों को सौंपने का निर्णय जनहित के खिलाफ है। इस फैसले के विरोध में बिजली विभाग की यूनियनें जो संघर्ष और हड़ताल कर रही हैं, उनका एसोसिएशन पूरी तरह समर्थन करती है। पत्र में कहा गया है कि बिजली जैसी आवश्यक सार्वजनिक सेवा का निजीकरण आम जनता, किसानों, मजदूरों, गरीब और मध्यम वर्ग के साथ-साथ कर्मचारियों के हितों को प्रभावित करेगा। ऐसी सेवाओं को निजी हाथों में सौंपने की बजाय उन्हें और अधिक मजबूत बनाया जाना चाहिए। नर्सिंग ऑफिसर्स वेलफेयर एसोसिएशन का मानना है कि बिजली, स्वास्थ्य और शिक्षा जैसी बुनियादी सेवाओं में सरकार की जवाबदेही बनी रहनी चाहिए। इन सेवाओं का निजीकरण होने से न केवल कर्मचारियों की नौकरी और सेवा सुरक्षा पर खतरा मंडराएगा, बल्कि आम उपभोक्ताओं पर भी इसका प्रतिकूल असर पड़ेगा। निजी कंपनियां मुनाफे के लिए काम करेंगी और महंगी बिजली बेचेंगी, जिसका बोझ गरीब जनता पर पड़ेगा।
एसोसिएशन की प्रदेश अध्यक्ष विनिता बांगड़ ने कहा कि कर्मचारियों की सेवा सुरक्षा, रोजगार और उपभोक्ताओं के हितों को नजरअंदाज नहीं किया जा सकता। कर्मचारी संगठनों की जायज मांगों को सुनना और जनहित में निर्णय लेना सरकार की जिम्मेदारी है। उन्होंने हरियाणा सरकार से अपील की है कि बिजली वितरण प्रणाली के निजीकरण के फैसले पर पुनर्विचार किया जाए और इसे तुरंत वापस लिया जाए, ताकि सरकार द्वारा दी जाने वाली सार्वजनिक सेवाओं को बेहतर तरीके से चलाया जा सके और कर्मचारियों के हितों की रक्षा हो सके। एसोसिएशन ने चेतावनी दी कि अगर सरकार ने जनविरोधी फैसला वापस नहीं लिया तो स्वास्थ्य कर्मचारी भी आंदोलन में शामिल होने पर विचार करेंगे।
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हिन्दुस्थान समाचार / संजीव शर्मा