गुरुग्राम व नूंह में बिजली वितरण निजी कंपनी को सौंपने के विरोध में उतरी हरियाणा पावर इंजीनियर्स एसोसिएशन
-इलेवन पावर के पास नहीं कोई अनुभव, टर्न ओवर भी शून्य
चंडीगढ़, 27 सितंबर (हि.स.)। हरियाणा पावर इंजीनियर्स एसोसिएशन ने गुरुग्राम व नूंह जिलों में समानांतर बिजली वितरण लाइसेंस हासिल करने के लिए इलेवन पॉवर प्राइवेट लिमिटेड द्वारा दायर याचिका का विरोध कर दिया है। एसोसिएशन ने इस पूरी प्रक्रिया की पारदर्शिता और निष्पक्षता पर गंभीर सवाल खड़े करते हुए आंदोलन की चेतावनी दी है। मामला वर्तमान में हरियाणा विद्युत विनियामक आयोग के समक्ष विचाराधीन है। इस संबंध में हाईकोर्ट के निर्देश पर एचईआरसी द्वारा सोमवार को एसोसिएशन का पक्ष सुना जा सकता है।
एसोसिएशन के महासचिव रविंदर घनघस ने बताया कि आवेदक कंपनी इलेवन पॉवर ने पंजाब एवं हरियाणा हाईकोर्ट में पहले ही एक अग्रिम कैविएट दाखिल कर दी है। कंपनी को अंदेशा है कि ऑल इंडिया पावर इंजीनियर्स फैडरेशन, कर्मचारी व उपभोक्ता संगठन आयोग के फैसले के खिलाफ हाईकोर्ट जा सकते हैं। एसोसिएशन का कहना है कि विनियामक आदेश आने से पहले ही अग्रिम कैविएट दाखिल करने से लाइसेंसिंग प्रक्रिया की निष्पक्षता को लेकर गंभीर आशंकाएं पैदा हो रही हैं। एचपीईए ने मांग की है कि आयोग इस पूरी प्रक्रिया में पारदर्शिता बरते।
इलेवन पावर कंपनी का वर्ष 2025-26 में टर्नओवर 'शून्य रुपए' था और उसके पास बिजली वितरण का कोई तकनीकी अनुभव नहीं है। कंपनी के पास संपत्ति के नाम पर केवल मेदांता ग्रुप (ग्लोबल हेल्थ) की सहायक कंपनी के शेयर हैं। एसोसिएशन का तर्क है कि आयोग को ऐसी अनुभवहीन कंपनी का आवेदन शुरू में ही खारिज कर देना चाहिए था।
एचईआरसी द्वारा गठित एक्सपर्ट कमेटी ने बैंक के 1,000 करोड़ और एक अन्य कंपनी के 1,000 करोड़ के दो अलग-अलग सॉल्वेंसी सर्टिफिकेट्स को जोडक़र 2,000 करोड़ मान लिया, जो वित्तीय व कानूनी रूप से पूरी तरह गलत है।
हरियाणा पावर इंजीनियर्स एसोसिएशन ने स्पष्ट किया है कि यदि इंजीनियरों, कर्मचारियों, किसानों और उपभोक्ताओं की आपत्तियों पर ध्यान दिए बिना कोई एकतरफा फैसला थोपा गया, तो अन्य जन-संगठनों के साथ मिलकर राज्यव्यापी, शांतिपूर्ण और लोकतांत्रिक आंदोलन शुरू करने के लिए बाध्य होगी।
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हिन्दुस्थान समाचार / संजीव शर्मा