गुरुग्राम: आठ देशों के प्रतिनिधिमंडल ने देखा निपुण हरियाणा मॉडल

 


-अंतरराष्ट्रीय टीम ने हरियाणा के डिजिटल इकोसिस्टम की तारीफ की

गुरुग्राम, 06 मई (हि.स.)। साउथ लर्निंग सिम्पोजियम के तहत दुनिया के आठ देशों के शीर्ष शिक्षा विशेषज्ञों, नीति निर्माताओं और प्रतिष्ठित अंतरराष्ट्रीय संस्थाओं के प्रतिनिधिमंडल ने हरियाणा के स्कूलों का दौरा किया। दक्षिण अफ्रीका, नाइजीरिया, रवांडा, घाना, केन्या, तंजानिया, नेपाल और यूनाइटेड किंगडम के अलावा यूनेस्को, यूनिसेफ, वल्र्ड बैंक, ऑक्सफोर्ड यूनिवर्सिटी के प्रतिनिधि शामिल रहे।

इन विशेषज्ञों ने गुरुग्राम, रोहतक, झज्जर और सोनीपत के चयनित स्कूलों में जाकर यह देखा कि कैसे एक राज्य ने अपनी पूरी प्राथमिक शिक्षा प्रणाली को डिजिटल और डेटा-आधारित बना दिया है। इस दौरे का उद्देश्य निपुण हरियाणा मिशन के उस सफल मॉडल को करीब से देखना था, जिसकी चर्चा अब ऑक्सफोर्ड यूनिवर्सिटी से लेकर वल्र्ड बैंक तक हो रही है। दौरे के दौरान अंतरराष्ट्रीय टीम ने हरियाणा के डिजिटल इकोसिस्टम की जमकर तारीफ की। विशेषज्ञों ने माना कि हरियाणा ने तकनीक का ऐसा समावेश किया है जो विकसित देशों के लिए भी प्रेरणा है। टीम ने लाइव देखा कि कैसे मेंटर कक्षा में जाकर बच्चों का स्पॉट-असेसमेंट करते हैं और डेटा तुरंत राज्य स्तरीय डैशबोर्ड पर रिफ्लेक्ट होता है। विदेशी विशेषज्ञों ने शिक्षकों के हाथ में मौजूद डिजिटल टूलकिट और लेसन प्लांस को सराहा, जो पढ़ाई को बोझिल नहीं, बल्कि मजेदार बनाते हैं। प्रतिनिधिमंडल इस बात से हैरान था कि कैसे एक ऐप के जरिए ग्रामीण क्षेत्रों के अभिभावक भी अपने बच्चे की पढ़ाई की रियल-टाइम प्रोग्रेस देख रहे हैं। प्रतिनिधिमंडल ने गुरुग्राम के सेक्टर-43, 44 (कन्हई), रोहतक के खरावड़, झज्जर के बालौर और सोनीपत के कबीरपुर जैसे स्कूलों का दौरा किया। टीचिंग-लर्निंग मैटेरियल टीम ने देखा कि कैसे लकड़ी के खिलौनों, काड्र्स और कहानियों के जरिए गणित और भाषा सिखाई जा रही है।

बच्चों के भविष्य को सुरक्षित करने का है संकल्प

गुरुग्राम में निपुण मिशन के सफल संचालन का नेतृत्व कर रहे जिला कोऑर्डिनेटर मनोज कुमार लाकड़ा ने प्रतिनिधिमंडल को बताया कि निपुण हरियाणा मिशन केवल एक सरकारी योजना नहीं, बल्कि हमारे बच्चों के भविष्य को सुरक्षित करने का एक संकल्प है। हमने तकनीक और मानवीय संवेदना के बीच एक ऐसा पुल बनाया है, जहां हर बच्चे की सीखने की गति पर हमारी नजर है। आज जब अंतरराष्ट्रीय टीमें हमारे शिक्षकों के टीएलएम और डेटा डैशबोर्ड की सराहना करती है तो यह हमारे फील्ड स्टाफ की दिन-रात की मेहनत का प्रमाण है। हमारा लक्ष्य स्पष्ट है कि कक्षा तीसरी तक का हर बच्चा न केवल पढऩा सीखे, बल्कि समझ के साथ पढऩा सीखे।

हिन्दुस्थान समाचार / ईश्वर