गुरुग्राम में जैन समाज ने श्रद्धा एवं संयम के साथ मनाया पर्वाधिराज दशलक्षण महापर्व
-श्री 1008 पाश्र्वनाथ दिगंबर जैन मंदिर जैकबपुरा ने निकाली वार्षिक रथ यात्रा
गुरुग्राम, 28 सितंबर (हि.स.)। जैन धर्म के सबसे पवित्र पर्व, पर्वाधिराज दशलक्षण महापर्व गुरुग्राम के जैकबपुरा स्थित श्री 1008 पाश्र्वनाथ दिगंबर जैन मंदिर में त्याग, तपस्या, संयम और साधना के साथ मनाया गया। दशलक्षण पर्व का समापन क्षमावाणी महापर्व के रूप में किया गया। सभी जैन बंधुओं ने एक-दूसरे से मिच्छामि दुक्कड़म्-उत्तम क्षमा कहकर जाने-अनजाने हुई भूलों के लिए क्षमा याचना की गई। मंगलवार की सुबह कार्यक्रम में हरियाणा मानवाधिकार आयोग के सदस्य कुलदीप जैन ने शिरकत की। उन्होंने रथ यात्रा में उपस्थित होकर भगवान का आशीर्वाद लिया।
मंदिर प्रबंधन कमेटी के अनुसार दशलक्षण महापर्व के दस दिन आत्मशुद्धि के दस धर्मों-उत्तम क्षमा, मार्दव, आर्जव, शौच, सत्य, संयम, तप, त्याग, आकिंचन्य और ब्रह्मचर्य के प्रतीक हैं। इन दस दिनों में श्रद्धालु व्रत, उपवास, स्वाध्याय और प्रवचनों के माध्यम से अपने जीवन को संयमित करने का प्रयास करते हैं। प्रतिदिन प्रात:कालीन अभिषेक, शांतिधारा और भक्ति के बाद विद्वानों द्वारा दशलक्षण धर्म पर प्रवचन आयोजित किए गए। सायंकाल में सांस्कृतिक कार्यक्रम, भजन संध्या और तत्व चर्चा का आयोजन हुआ।
सोमवार को मंदिर जी से श्री नशिया जी तक वार्षिक रथ यात्रा निकाली गई। रथ यात्रा में भगवान पाश्र्ववनाथ की प्रतिमा को रथ में विराजमान कर नगर भ्रमण कराया जाएगा। श्री दिगंबर जैन समाज गुरुग्राम श्री 1008 पाश्र्वनाथ दिगंबर जैन मंदिर जैकबपुरा के प्रधान नरेश कुमार जैन (धनकोट), उप-प्रधान शैलेंद्र जैन, महामंत्री अशोक कुमार जैन (मियांवाली कॉलोनी), सह-मंत्री जिनेंद्र जैन (बर्तन वाले), कोषाध्यक्ष प्रदीप जैन ने बताया कि श्री 1008 पाश्र्वनाथ दिगंबर जैन मंदिर जी जैकबपुरा से नशिया जी जाने वाले पात्रों में ख्वासी अभय जैन, ऋषभ जैन (एडवोकेट) रहे। जैन समाज के प्रवक्ता अभय जैन एडवोकेट ने बताया कि जैन समाज का सिद्धांत धर्म की स्थापना के साथ क्षमा याचना भी है। क्योंकि व्यक्ति के साथ कमाया गया पैसा नहीं धर्म साथ जाता है। क्षमा करना भी एक बड़ा धर्म है।
सारथी प्रदीप जैन पुत्र स्व. पुष्पचंद जैन पूर्व प्रधान, धन कुबेर राकेश जैन पुत्र स्व. हरिकिशन जैन नारनौल वाले, इन्द्र प्रथम पारस जैन पुत्र किशन चंद जैन जलेबी वाले, इन्द्र द्वितीय मोहित जैन पुत्र स्व. जय कुमार जैन फर्रुखनगर वाले शामिल रहे। नशिया जी से वापसी में श्री 1008 पाश्र्वनाथ दिगंबर जैन मंदिर जी आने वाले पात्रों में ख्वासी ऋषभ जैन पुत्र स्व. सुरेश चंद जैन टाइप वाले, सारथी अतिन जैन आदर्श नगर, धन कुबेर आरव जैन पुत्र पंकज जैन सिद्धार्थ फर्नीचर, इन्द्र प्रथम संदीप जैन बंद वाले, इन्द्र द्वितीय शैलेंद्र जैन उप-प्रधान शामिल रहे।
हिन्दुस्थान समाचार / ईश्वर