गुरुग्राम: भारत-न्यूजीलैंड एफटीए से हमारे उद्योगों को मिलेगा निर्यात का बड़ा बाजार: दीपक मैनी

 


-न्यूजीलैंड में भारतीय उत्पादों को 100 प्रतिशत टैरिफ लाइन पर शुल्क-मुक्त पहुंच

-ऑटो-कंपोनेंट, इंजीनियरिंग, टेक्सटाइल और जेम्स-ज्वेलरी सेक्टर को फायदा

गुरुग्राम, 17 सितंबर (हि.स.)। भारत और न्यूजीलैंड के बीच मुक्त व्यापार समझौते को न्यूजीलैंड की संसद से अंतिम मंजूरी मिलने से दोनों देशों के बीच कारोबार बढऩे का रास्ता साफ हुआ है। इससे भारतीय उद्योगों के लिए न्यूजीलैंड का बाजार ज्यादा खुला होगा और हरियाणा के साथ गुरुग्राम की ऑटो, ऑटो-कंपोनेंट, इंजीनियरिंग, टेक्सटाइल, फुटवियर और जेम्स-ज्वेलरी इंडस्ट्री को निर्यात के नए अवसर मिल सकते हैं। यह कहना है प्रोग्रेसिव फेडरेशन ऑफ ट्रेड एंड इंडस्ट्री (पीएफटीआई) के चेयरमैन दीपक मैनी का।

गुरुवार को उन्होंने कहा कि यह समझौता भारतीय उद्योगों को नए बाजार से जोडऩे और निर्यात बढ़ाने में मदद कर सकता है। मैनी ने कहा कि समझौते के तहत न्यूजीलैंड भारत के 100 प्रतिशत निर्यात पर शुल्क-मुक्त बाजार पहुंच देगा। दोनों देशों ने 27 अप्रैल को स्नञ्ज्र पर हस्ताक्षर किए थे और अब न्यूजीलैंड की संसद की मंजूरी के बाद अगले महीने से इसके लागू होने की उम्मीद है। साथ ही न्यूजीलैंड भारत के कपड़ा, परिधान, चमड़ा, जूते, रत्न एवं आभूषण और इंजीनियरिंग सामान समेत कई उत्पादों को शुल्क-मुक्त बाजार उपलब्ध कराएगा। न्यूजीलैंड ने भारत के 70 प्रतिशत उत्पादों पर शुल्क में छूट देने की बात कही है। मैनी के अनुसार इससे भारतीय कंपनियों के उत्पाद न्यूजीलैंड के बाजार में अधिक प्रतिस्पर्धी हो सकेंगे। भारत न्यूजीलैंड से मुख्य रूप से डेयरी उत्पाद, लकड़ी और वुड प्रोडक्ट्स, ऊन, फल, खाद्य उत्पाद और औद्योगिक कच्चा माल आयात करता है।

वहीं भारत से न्यूजीलैंड को टेक्सटाइल, गारमेंट, चमड़ा, फुटवियर, जेम्स-ज्वेलरी, इंजीनियरिंग सामान, मशीनरी, ऑटो-कंपोनेंट और दवा उत्पाद भेजे जाते हैं।

मैनी ने कहा कि गुरुग्राम में ऑटोमोबाइल और ऑटो-कंपोनेंट के अलावा इंजीनियरिंग व अन्य मैन्युफैक्चरिंग कंपनियों का बड़ा आधार है। स्नञ्ज्र के बाद इन उद्योगों को न्यूजीलैंड में नए ग्राहक और कारोबार तलाशने का अवसर मिलेगा। हरियाणा के एमएसएमई भी इसका फायदा उठा सकते हैं। उन्होंने बताया कि समझौते में न्यूजीलैंड की ओर से अगले 15 वर्षों में भारत में 20 अरब डॉलर के निवेश की प्रतिबद्धता है। साथ ही भारतीय पेशेवरों के लिए एक समय में 5,000 तक अस्थायी रोजगार वीजा की व्यवस्था होगी। इससे निवेश और सर्विस सेक्टर में रोजगार के नए अवसर बन सकते हैं।

हिन्दुस्थान समाचार / ईश्वर