गुरुग्राम: बिजली के निजीकरण करने के विरोध में हड़ताल पर गरजे बिजलीकर्मी
-बिजली कर्मियों की हड़ताल से गहराया बिजली संकट, उद्योगों को नुकसान
-बिजली कटौती से आमजन भी रहे प्रभावित, कई-कई घंटे गुल रही बिजली
-बुधवार की रात 10 बजे से शुरू हो गई थी कर्मचारियों की तीन दिवसीय हड़ताल
गुरुग्राम, 22 अक्टूबर (हि.स.)। बिजली वितरण व्यवस्था के निजीकरण के विरोध में गुरुवार से शुरू हुई बिजली कर्मियों की तीन दिवसीय हड़ताल से गुरुग्राम में बिजली संकट गहरा गया। सेक्टर-37 सहित कई औद्योगिक क्षेत्रों में बुधवार रात से बिजली गुल है, जिससे सैकड़ों इकाइयों का उत्पादन ठप पड़ गया और करोड़ों रुपये के नुकसान की आशंका है।
जानकारी के अनुसार सेक्टर-37 औद्योगिक क्षेत्र में बुधवार रात करीब 10 बजे से आपूर्ति प्रभावित होनी शुरू हुई और कुछ ही देर में पूरे क्षेत्र में ब्लैकआउट जैसी स्थिति बन गई। बिजली न होने से मशीनें बंद हो गईं और उत्पादन ठप हो गया। कादीपुर और बसई औद्योगिक क्षेत्र में भी आपूर्ति प्रभावित है। प्रोग्रेसिव फेडरेशन ऑफ ट्रेड एंड इंडस्ट्री के चेयरमैन दीपक मैनी के मुताबिक रात 10 बजे के बाद से धीरे-धीरे पूरे औद्योगिक क्षेत्र में अंधेरा छा गया। सेंकड़ों इकाइयों में काम बंद होने से नुकसान बढ़ रहा है। उद्यमियों को चिंता है कि अगर आपूर्ति बहाल होने में देरी हुई तो तैयार माल की सप्लाई और तय समय पर ऑर्डर पूरा करने में भी दिक्कत आएगी। इसका असर कारोबार के साथ-साथ निर्यात पर भी पड़ सकता है। बिजली संकट सिर्फ औद्योगिक इलाकों तक सीमित नहीं रहा। सेक्टर-10ए, गढ़ी गांव सहित कई रिहायशी इलाकों में बुधवार रात 11 बजे से बिजली गुल है, जो गुरुवार दोपहर तक बहाल नहीं हो पाई थी। इससे लोगों को भारी परेशानी का सामना करना पड़ा।
गुरुग्राम और नूंह की बिजली वितरण व्यवस्था निजी हाथों में सौंपने के विरोध में बिजली कर्मचारियों ने हड़ताल शुरू की है। हड़ताल रोकने के लिए मुख्यमंत्री नायब सिंह सैनी ने बिजली कर्मियों से हड़ताल वापस लेने का आग्रह किया था। उनकी मांग को अदालत तक ले जाने के लिए सरकार ने अच्छा अधिवक्ता बताने की भी बात कही।
हिन्दुस्थान समाचार / ईश्वर