गुरु जंभेश्वर विवि के संविदा सहायक प्रोफेसर नहीं होंगे नियमित

 

चंडीगढ़, 14 जनवरी (हि.स.)। पंजाब एवं हरियाणा हाईकोर्ट ने गुरु जंभेश्वर विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी विश्वविद्यालय हिसार में वर्षों से संविदा आधार पर कार्यरत सहायक प्रोफेसरों की नियमितीकरण की मांग को खारिज करते हुए कहा कि लंबी अवधि तक सेवा देने मात्र से नियमित नियुक्ति का अधिकार स्वयं उत्पन्न नहीं हो जाता, विशेषकर तब, जब प्रारंभिक नियुक्ति विश्वविद्यालय के वैधानिक नियमों और निर्धारित चयन प्रक्रिया के अनुरूप न हुई हो। जस्टिस त्रिभुवन दहिया ने

बुधवार को फैसला सुनाते हुए कहा कि विश्वविद्यालयों में सहायक प्रोफेसर जैसे अकादमिक पदों पर नियुक्ति एक साधारण प्रशासनिक प्रक्रिया नहीं, बल्कि एक पवित्र और अनिवार्य चयन व्यवस्था के तहत की जाने वाली प्रक्रिया है, जिसे नजरअंदाज कर नियमितीकरण का दावा स्वीकार नहीं किया जा सकता।

याचिकाकर्ताओं का कहना था कि वे वर्ष 2010 से 2015 के बीच विश्वविद्यालय के विभिन्न विभागों कंप्यूटर साइंस, मैकेनिकल इंजीनियरिंग, फार्मास्युटिकल साइंसेज, फूड टेक्नोलाजी, मास कम्युनिकेशन और फिजियोथेरेपी में वाक-इन-इंटरव्यू के माध्यम से संविदा आधार पर नियुक्त किए गए थे। उन्होंने दलील दी कि वे यूजीसी और एआइसीटीई की सभी आवश्यक शैक्षणिक योग्यताओं को पूरा करते हैं। एक दशक से अधिक समय से लगातार सेवाएं दे रहे हैं और उनका कार्य नियमित सहायक प्रोफेसरों के समान है, इसलिए उन्हें नियमित किया जाना चाहिए।

अदालत ने इस दलील को स्वीकार करने से इंकार करते हुए कहा कि याचिकाकर्ताओं की नियुक्ति विश्वविद्यालय अधिनियम और स्टैच्यूट्स के अंतर्गत गठित नियमित चयन समिति द्वारा नहीं की गई थी। उन्हें केवल एडहाक चयन समितियों की सिफारिश पर सीमित अवधि के लिए और वाक-इन इंटरव्यू के जरिए नियुक्त किया गया था। यह प्रक्रिया नियमित नियुक्ति की अनिवार्य चयन प्रणाली का स्थान नहीं ले सकती।

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हिन्दुस्थान समाचार / संजीव शर्मा