हिसार : बढ़ते तनाव के दौर में यूएचवी विद्यार्थियों को दे रहा जीवन समझने की नई दृष्टि

 


यूएचवी एफडीपी में डॉ. हिमांशु राय ने समझाया शरीर और स्वयं की जरूरतों का

अंतर

हिसार, 25 सितंबर (हि.स.)। विद्यार्थियों में बढ़ता तनाव, प्रतिस्पर्धा, भविष्य

की चिंता और रिश्तों को लेकर असमंजस आज बड़ी चुनौती बनता जा रहा है। ऐसे दौर में केवल

बाहरी सुविधाओं और उपलब्धियों को तनाव का समाधान मानने के बजाय स्वयं को समझना और जीवन

के प्रति स्पष्ट दृष्टिकोण विकसित करना जरूरी है।

इसी दिशा में गुरु जम्भेश्वर विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी विश्वविद्यालय में यूनिवर्सल

ह्यूमन वैल्यूज (यूएचवी) के तीन दिवसीय इंट्रोडक्टरी यूएचवी एफडीपी का आयोजन किया जा

रहा है। कार्यक्रम के दूसरे दिन शुक्रवार काे एआईसीटीई के संसाधन व्यक्ति डॉ. हिमांशु राय ने प्रतिभागियों

को तनाव के कारणों और उससे बाहर निकलने के लिए आत्म-अन्वेषण व सही समझ की जरूरत पर

विस्तार से चर्चा की।

डॉ. राय ने मानव शरीर और स्वयं के बीच अंतर समझाते हुए कहा कि दोनों साथ रहते

हैं, लेकिन उनकी जरूरतें अलग हैं। शरीर को भोजन, कपड़े और रहने जैसी भौतिक जरूरतें

होती हैं, जबकि स्वयं की जरूरतों में खुशी, सम्मान, शांति और प्रेम शामिल हैं। समस्या

तब पैदा होती है जब व्यक्ति स्वयं की जरूरतों को बाहरी वस्तुओं से पूरा करने का प्रयास

करता है। उन्होंने कहा कि विद्यार्थी कई बार दोस्तों के दबाव में महंगे मोबाइल, गैजेट्स,

कपड़े या ऊंचे पैकेज को सम्मान और खुशी का आधार मान लेते हैं। अपेक्षाएं पूरी नहीं

होने पर तनाव बढ़ने लगता है। उन्होंने मानवीय रिश्तों में विश्वास को आधार बताते हुए

कहा कि सामने वाले की चाहत को समझना जरूरी है। यदि कोई व्यक्ति हमारे साथ अपेक्षित

व्यवहार नहीं कर पाता तो इसे उसकी चाहत की कमी के बजाय योग्यता की कमी के रूप में समझना

चाहिए। ऐसी समझ गुस्सा और चिड़चिड़ापन कम करने के साथ रिश्तों में बेहतर संवाद का आधार

बन सकती है। उन्होंने सम्मान को सम्यक मान बताते हुए किसी व्यक्ति या वस्तु का सही

आकलन करने पर भी जोर दिया।

एफडीपी में फैकल्टी एवं विद्यार्थियों ने सक्रिय सहभागिता करते हुए अपने अनुभव

साझा किए और जीवन से जुड़े विभिन्न सवालों पर खुलकर संवाद किया। चर्चा में यह बात सामने

आई कि यूएचवी केवल एक विषय या पाठ्यक्रम नहीं, बल्कि स्वयं को समझने, रिश्तों में सामंजस्य

विकसित करने और जीवन को बेहतर ढंग से जीने की प्रक्रिया है।

कार्यक्रम का उद्देश्य विद्यार्थियों और शिक्षकों में समझ, आशा और सही जीवन-दृष्टि

विकसित करना है। विश्वविद्यालय का यूएचवी सेल मूल्य-आधारित एवं समग्र शिक्षा की दिशा

में इस पहल के माध्यम से शिक्षा के साथ विद्यार्थियों के मानवीय और व्यक्तिगत विकास

पर भी जोर दे रहा है।

हिन्दुस्थान समाचार / राजेश्वर