हिसार : अब खारे पानी एवं जलभराव वाले क्षेत्रों में मत्स्य पालन को मिलेगा बढ़ावा
एचएयू व सीआईबीए, चेन्नई (आईसीएआर) के बीच हुआ
अह्म समझौता
हिसार, 27 जून (हि.स.)। हरियाणा कृषि विश्वविद्यालय
के मत्स्य विज्ञान महाविद्यालय तथा भारतीय कृषि अनुसंधान परिषद के अंतर्गत कार्यरत सेंट्रल इंस्टीट्यूट ऑफ ब्रैकिशवॉटर
एक्वाकल्चर (सीआईबीए), चेन्नई के बीच मत्स्य पालन एवं जलीय कृषि के क्षेत्र में अनुसंधान,
तकनीकी सहयोग तथा किसानों के प्रशिक्षण को बढ़ावा देने के उद्देश्य से एक महत्वपूर्ण
समझौता ज्ञापन पर हस्ताक्षर किए गए हैं। समझौते पर हकृवि की ओर से अनुसंधान निदेशक
डॉ. राजबीर गर्ग तथा मानव संसाधन प्रबंधन निदेशक डॉ रमेश यादव ने जबकि सीआईबीए, चेन्नई
की ओर से निदेशक डॉ. कुलदीप लाल एवं प्रधान वैज्ञानिक डॉ. प्रसन्ना कुमार पाटिल ने
हस्ताक्षर किए।
कुलपति प्रो बलदेव राज कम्बोज ने बताया कि हरियाणा
के अनेक क्षेत्रों में जलभराव (वाटर लॉगिंग) तथा भूमिगत खारे पानी (अंडरग्राउंड सलाइन
वॉटर) की समस्या के कारण कृषि उत्पादन प्रभावित होता है। ऐसे क्षेत्रों में पारंपरिक
खेती आर्थिक रूप से लाभकारी नहीं रह जाती। अब इस समझौते के माध्यम से अनुपयोगी/ कम
उत्पादक भूमि क्षेत्रों को मत्स्य पालन के लिए उपयोग में लाने की दिशा में वैज्ञानिक
प्रयास किए जाएंगे।
उन्होंने बताया कि ऐसे क्षेत्रों में उपयुक्त मछली प्रजातियों का चयन, जल
गुणवत्ता परीक्षण तथा प्रतिष्ठित संस्थानों के मार्गदर्शन में मत्स्य पालन करना अधिक
लाभदायक रहेगा। कुलपति प्रो काम्बोज ने बताया कि मत्स्य पालन से अनुपयोगी भूमि का उपयोग
होगा जिससे अतिरिक्त आय का स्रोत, रोजगार सृजन, जल संसाधनों का बेहतर उपयोग, फसल जोखिम
में कमी, पोषण सुरक्षा, निर्यात एवं बाजार के अवसर भी बढ़ेंगे।
सीआईबीए निदेशक एवं प्रधान वैज्ञानिक डॉ कुलदीप
लाल ने बताया कि यह देश का एक अग्रणी संस्थान है, जो खारे पानी में जलीय कृषि (ब्रैकिशवॉटर
एक्वाकल्चर) के क्षेत्र में अनुसंधान एवं तकनीकी विकास का कार्य करता है। संस्थान की
विशेषज्ञता का लाभ हरियाणा के किसानों को उपलब्ध कराया जाएगा, जिससे खारे पानी एवं
जलभराव वाले क्षेत्रों में भी व्यावसायिक मत्स्य पालन को बढ़ावा मिल सकेगा। इस अवसर पर ओएसडी डॉ. अतुल ढींगड़ा, मौलिक विज्ञान
एवं मानविकी महाविद्यालय के अधिष्ठाता डॉ. राजेश गेरा, डॉ. आरके गुप्ता, डॉ. दिलीप
बिश्नोई, डॉ. नितीश बंसल, डॉ. अनुराग व संस्थान के प्रतिनिधि उपस्थित रहे।
हिन्दुस्थान समाचार / राजेश्वर